Headlines

बाढ़ प्रभावित किसानों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव, मुआवजे की मांग तेज

बाढ़ से बर्बाद फसल के मुआवजे की मांग को लेकर जगदलपुर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते किसान। बस्तर में बाढ़ प्रभावित किसानों का प्रदर्शन, मुआवजे की मांग
बस्तर में बाढ़ से फसलें बर्बाद होने और मकानों को नुकसान पहुंचने के बाद प्रभावित किसानों ने मुआवजे की मांग तेज कर दी है। गुरुवार को हजारों किसानों ने कांग्रेस नेताओं के साथ जगदलपुर में रैली निकालकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फसल, मकान और मवेशियों के नुकसान की भरपाई करने के साथ कृषि ऋण माफ करने की मांग उठाई। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि 10 दिन के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ट्रैक्टरों के जरिए शहर में जाम किया जाएगा।

बर्बाद फसल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान

बाढ़ प्रभावित किसान महिला, पुरुष और युवाओं सहित बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए। रैली के दौरान नारेबाजी करते हुए किसान कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और वहां बैठकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारी अपने साथ बर्बाद फसल भी लेकर आए, ताकि प्रशासन के सामने नुकसान की स्थिति रखी जा सके।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने आरोप लगाया कि बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के नाम पर केवल औपचारिकता की जा रही है। उन्होंने किसानों को प्रति एकड़ 65 हजार रुपये मुआवजा देने की मांग की। इसके अलावा कच्चे मकान के लिए 3 लाख रुपये, पक्के मकान के लिए 5 लाख रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता देने की मांग रखी गई।

प्रदर्शनकारियों ने बाढ़ में बह गए मवेशियों के लिए 60 हजार रुपये मुआवजा देने और खेती के लिए लिए गए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण को माफ करने की मांग भी उठाई।

10 दिन का अल्टीमेटम, ट्रैक्टरों से शहर जाम करने की चेतावनी

किसान नेताओं ने कहा कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सुशील मौर्य ने आने वाले दिनों में ट्रैक्टर मार्च निकालने और इसके बाद कलेक्ट्रेट के सामने दिन-रात अनिश्चितकालीन धरना देने की चेतावनी दी।

वहीं, किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दयाराम कश्यप ने कहा कि 10 दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर ट्रैक्टरों के जरिए पूरे जगदलपुर शहर को जाम किया जाएगा।

फसल की लागत के मुकाबले राहत कम होने का दावा

प्रदर्शनकारियों ने सरकार की राहत व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक एकड़ में फसल की कटाई और मिंजाई समेत अन्य कामों पर करीब 8 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं, जबकि बाढ़ से पूरी फसल बर्बाद होने पर मिलने वाली राहत नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।

किसानों ने धान खरीदी की 21 क्विंटल प्रति एकड़ की व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि जब सरकार इस स्तर पर धान खरीदती है, तो बाढ़ से नष्ट हुई फसल के नुकसान की भरपाई भी उचित तरीके से की जानी चाहिए।

प्रशासन का दावा—मकान क्षति के लिए 30 करोड़ रुपये दिए

दूसरी ओर, अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने बताया कि राजस्व अमले के सर्वे के आधार पर मकानों को हुए नुकसान के लिए करीब 30 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दी जा चुकी है। उनके अनुसार, फसल क्षति का आकलन अभी जारी है और 50 लाख रुपये प्रभावितों के खातों में पहुंच चुके हैं।

अपर कलेक्टर ने यह भी बताया कि किसानों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन को राज्यपाल तक पहुंचाया जाएगा।

मुआवजे को लेकर आगे ये होगा

बाढ़ से प्रभावित किसान अब फसल, मकान और मवेशियों के नुकसान की भरपाई के लिए अपनी मांगों पर कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर किसान संगठन 10 दिन का अल्टीमेटम देकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि सर्वे और राहत वितरण की प्रक्रिया जारी है। अब यह देखना होगा कि निर्धारित समय में किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *