जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 18 नवंबर 2021 से पहले विदेशी मेडिकल डिग्री हासिल की थी। इसलिए वे राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के वर्ष 2021 के विदेशी चिकित्सा स्नातक लाइसेंसिएट नियमों के आधार पर फीस वापसी और स्टाइपेंड का दावा नहीं कर सकते।
ये थी डॉक्टरों की मांग
इस मामले में मुख्य याचिका डॉ. श्यामू कुमार जांगड़े और 13 अन्य डॉक्टरों ने दायर की थी। इनके अलावा डॉ. छत्रेश चौधरी और डॉ. प्रणव पांडेय ने भी अलग-अलग याचिकाएं लगाई थीं। हाईकोर्ट ने तीनों मामलों की एक साथ सुनवाई की।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने विदेश से MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद SIMS बिलासपुर में इंटर्नशिप के लिए एक-एक लाख रुपये फीस जमा की थी। बाद में NMC ने 4 मार्च 2022 को दिशा-निर्देश और 19 मई 2022 को एक परिपत्र जारी किया।
डॉक्टरों के मुताबिक, इन निर्देशों में 18 नवंबर 2021 से पहले विदेशी मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले छात्रों से इंटर्नशिप फीस नहीं लेने और उन्हें भारतीय मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के बराबर स्टाइपेंड व अन्य सुविधाएं देने की बात कही गई थी।
इसके बाद चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने भी 5 अगस्त 2022 को आदेश जारी किया था। इसी आधार पर डॉक्टरों ने अपनी पहले जमा की गई फीस वापस करने और इंटर्नशिप में पंजीयन की तारीख से स्टाइपेंड देने की मांग की थी।
अगस्त 2022 से मिलना शुरू हुआ था स्टाइपेंड
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अगस्त 2022 से स्टाइपेंड मिलना शुरू हुआ, लेकिन इससे पहले की अवधि का भुगतान नहीं किया गया। इसी अवधि के बकाया स्टाइपेंड और जमा की गई फीस की वापसी के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
राज्य सरकार ने फीस वापसी का किया विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि संबंधित डॉक्टरों ने वर्ष 2015 में ही इंटर्नशिप फीस जमा कर दी थी। सरकार के अनुसार, 24 नवंबर 2022 को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि 4 मार्च 2022 का परिपत्र जारी होने से पहले जिन छात्रों से इंटर्नशिप फीस ली जा चुकी है, उसे वापस नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार ने कहा कि बाद में जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर पहले जमा की गई फीस लौटाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं
हाईकोर्ट ने मामले में पाया कि सभी याचिकाकर्ताओं ने 18 नवंबर 2021 से पहले अपनी विदेशी मेडिकल डिग्री प्राप्त की थी। कोर्ट ने कहा कि वे NMC के वर्ष 2021 के नए नियमों के आधार पर फीस वापसी का लाभ नहीं मांग सकते। फीस वापसी के संबंध में राज्य सरकार का 24 नवंबर 2022 का निर्णय भी रिकॉर्ड पर मौजूद था।
स्टाइपेंड के मामले में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से ऐसा कोई अन्य लागू प्रावधान या विशेष निर्देश पेश नहीं किया गया, जिसके आधार पर अगस्त 2022 से पहले की अवधि का स्टाइपेंड देने का आदेश दिया जा सके।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाएं खारिज कर दीं। सुनवाई के दौरान डॉक्टरों की ओर से अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव और राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा ने पक्ष रखा।
