देश में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में दिन के समय बनने वाली अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखकर जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की राष्ट्रीय विद्युत योजना के तहत वर्ष 2030 तक देश में 208 गीगावाट घंटे (GWh) क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
देश में 798 MWh बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं स्थापित
केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में एक मेगावाट घंटे से अधिक क्षमता वाली कुल 798 MWh की बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 35.8 GWh क्षमता की परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी है।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 120 MWh क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम संचालित है। इस तरह की परियोजनाओं का उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरी में सुरक्षित रखना और मांग बढ़ने पर ग्रिड को उपलब्ध कराना है।
बिजली ग्रिड को मिलेगी मजबूती
केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में बिजली की लगातार आपूर्ति बनाए रखने के लिए स्टोरेज सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
बैटरी में दिन के समय अतिरिक्त बिजली स्टोर करके रात में या कम उत्पादन के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बिजली ग्रिड की स्थिरता, वोल्टेज नियंत्रण, फ्रीक्वेंसी रेगुलेशन और ब्लैक स्टार्ट जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूती मिल सकती है।
सरकार ने एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया है। इसके अलावा वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
SECL का सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 MW के पार
कोल इंडिया की सहायक कंपनी SECL ने वित्त वर्ष 2028-29 तक 700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी ग्राउंड माउंटेड, रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं पर काम कर रही है।
संचालित, निर्माणाधीन और प्रस्तावित परियोजनाओं को मिलाकर SECL का सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 MW से अधिक हो गया है। कंपनी सूरजपुर जिले के भटगांव कोलियरी और बिश्रामपुर क्षेत्र में 40 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट संचालित कर रही है।
इनमें शामिल हैं:
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भटगांव सोलर प्लांट – 20 MW
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गोरखनाथपुर सोलर प्लांट – 8 MW
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शिवनंदनपुर सोलर प्लांट – 12 MW
इन परियोजनाओं से अब तक 90 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो चुका है। SECL भटगांव, बिश्रामपुर, जोहिला और सोहागपुर क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार कर रही है।
जलाशयों पर लगाए जाएंगे फ्लोटिंग सोलर पैनल
छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के प्रबंध संचालक संजीव कटियार के अनुसार, इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर संभावित जलाशयों का आकलन किया जा रहा है।
फ्लोटिंग सोलर परियोजना में पानी की सतह पर विशेष प्लेटफॉर्म लगाकर सौर पैनल स्थापित किए जाते हैं। इन पैनलों से तैयार बिजली को विशेष केबलों के माध्यम से सीधे ग्रिड तक पहुंचाया जाता है। इससे उपलब्ध जलाशयों की सतह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में 26 साल में दोगुने से ज्यादा हुई बिजली उत्पादन क्षमता
राज्य गठन के बाद नवंबर 2000 से सितंबर 2026 तक छत्तीसगढ़ के बिजली क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में राज्य की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 119 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
| बिजली उत्पादन क्षमता | नवंबर 2000 | सितंबर 2026 |
|---|---|---|
| ताप विद्युत | 1,240 MW | 2,840 MW |
| जल विद्युत | 120 MW | 138.70 MW |
| कुल स्थापित क्षमता | 1,360 MW | 2,978.70 MW |
इस दौरान प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग भी तेजी से बढ़ी है। नवंबर 2000 में यह 1,334 मेगावाट थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 7,083 मेगावाट पहुंच गई। यानी अधिकतम मांग में लगभग 431 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
बैटरी स्टोरेज और सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के बिजली क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और बिजली आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
