रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर मेमोरियल अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के इलाज में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग में पिछले दो महीनों के दौरान 13 मरीजों की सफल लंग लोबेक्टॉमी सर्जरी की गई है। इनमें से 9 बेहद जटिल ऑपरेशन सिर्फ 20 दिनों के भीतर किए गए।अस्पताल के मुताबिक, किसी सरकारी संस्थान में इतने कम समय में इस स्तर पर लोबेक्टॉमी सर्जरी का होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
15 साल के किशोर से 70 साल तक के मरीजों का ऑपरेशन
इन सर्जरी से लाभान्वित मरीजों की उम्र 15 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक रही। इनमें 15 वर्षीय किशोर भी शामिल है, जो एस्पर्जिलोमा यानी फंगल इंफेक्शन से पीड़ित था।डॉक्टरों ने उसके बाएं फेफड़े के ऊपरी लोब को सर्जरी के जरिए हटाया। अस्पताल में लोबेक्टॉमी कराने वाला यह अब तक का सबसे कम उम्र का मरीज बताया गया है।
खून की उल्टी वाले दो मरीजों का आपातकालीन ऑपरेशन
विभाग में दो ऐसे मरीजों का भी इमरजेंसी में ऑपरेशन किया गया, जो गंभीर हेमोप्टिसिस यानी खून की उल्टी की समस्या के साथ अस्पताल पहुंचे थे। समय पर सर्जरी कर दोनों मरीजों की जान बचाई गई।
क्या होती है लंग लोबेक्टॉमी
विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, लोबेक्टॉमी एक जटिल और जोखिम वाली सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें फेफड़े के उस हिस्से या लोब को हटाया जाता है, जो संक्रमण, ट्यूमर या किसी अन्य गंभीर बीमारी से प्रभावित हो।इन ऑपरेशनों में आधुनिक लंग स्टेपलर तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इससे सर्जरी की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से पूरा करने और ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
टीबी के पुराने मामलों से बढ़ती हैं फेफड़ों की जटिल बीमारियां
छत्तीसगढ़ में पुराने टीबी मामलों के कारण कुछ मरीजों में बाद में एस्पर्जिलोमा और ब्रोंकिएक्टेसिस जैसी फेफड़ों की बीमारियां देखने को मिलती हैं। इन स्थितियों में फेफड़ों के भीतर घाव बनने के कारण मरीज को मुंह से खून आने जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।ऐसे मामलों में बीमारी की स्थिति और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार समय पर लोबेक्टॉमी सर्जरी मरीज के लिए प्रभावी उपचार साबित हो सकती है।
दो महीने में 13 ऑपरेशन, सालाना औसत से बड़ी उपलब्धि
आंबेडकर अस्पताल का CTVS विभाग छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी करने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है। अस्पताल के अनुसार, पहले जहां यहां एक साल में करीब 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती थीं, वहीं अब महज दो महीने में 13 सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं।इससे विभाग में जटिल फेफड़ों की सर्जरी की क्षमता और विशेषज्ञता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कई राज्यों के मरीजों को मिल रहा इलाज
आंबेडकर अस्पताल में उपलब्ध इस सुविधा का लाभ सिर्फ छत्तीसगढ़ के मरीजों तक सीमित नहीं है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी मरीज यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।खास बात यह है कि आयुष्मान योजना के तहत इन जटिल और महंगे ऑपरेशनों को नि:शुल्क किया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उन्नत सर्जिकल उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
