11 अगस्त 2026, मंगलवार का दिन सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। आज श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसके अवसर पर मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही मंगलवार होने के कारण मंगलागौरी पूजन का भी विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार आज सिद्धि योग के बाद व्यतीपात योग का भी संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
11 अगस्त 2026 का पंचांग
- दिन: मंगलवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: वर्षा ऋतु
- मास: श्रावण
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: चतुर्दशी (12 अगस्त रात्रि 1:52 बजे तक), इसके बाद अमावस्या
- नक्षत्र: पुनर्वसु सुबह 10:09 बजे तक, इसके बाद पुष्य
- योग: सिद्धि शाम 6:51 बजे तक, इसके बाद व्यतीपात योग (12 अगस्त दोपहर 3:26 बजे तक)
- सूर्योदय: सुबह 6:17 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:10 बजे
- राहुकाल: शाम 3:58 बजे से 5:35 बजे तक
- दिशाशूल: उत्तर दिशा
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
आज मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। शिव भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके साथ ही विवाहित महिलाओं के लिए मंगलागौरी पूजन का भी विशेष महत्व है। शाम 6:51 बजे से व्यतीपात योग प्रारंभ होगा, जिसे धार्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण माना गया है।
धार्मिक मान्यताएं और सावधानियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्दशी, अमावस्या और व्रत के दिन संयम का पालन करने की सलाह दी गई है। चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के बर्तनों के स्थान पर अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग तथा पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना शुभ माना जाता है।
अमावस्या से जुड़े पारंपरिक उपाय
12 अगस्त को पड़ने वाली श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या) के अवसर पर कई पारंपरिक उपाय बताए जाते हैं। मान्यता है कि घर में नमक मिले पानी से पोछा लगाने से नकारात्मकता दूर होती है। वहीं कुछ लोग धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना से काले तिल, जौ, चावल, घी, चंदन, गुग्गुल, गुड़ और कपूर से हवन भी करते हैं। इन उपायों का आधार धार्मिक परंपराएं और लोकमान्यताएं हैं।
शिव पूजा का महत्व
श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि तथा परिवार की मंगलकामना करते हैं।
