राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले की जांच के बीच दान राशि की गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की दोनों पालियों का समय बढ़ाकर 8-8 घंटे कर दिया गया है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि काम के घंटे बढ़ने के बावजूद उनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत चढ़ावे की गणना में लगे कर्मचारी अब प्रत्येक पाली में लगातार आठ घंटे तक नोटों की छंटाई, गिनती और गड्डियां तैयार करने का काम करेंगे। पहली पाली सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर 12:30 बजे से रात 8:30 बजे तक संचालित होगी। कुछ समय के लिए दोनों पालियां समानांतर रूप से भी काम करेंगी, ताकि गणना प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रहे।
इससे पहले कर्मचारियों की ड्यूटी छह-छह घंटे की होती थी। एक कर्मचारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि ड्यूटी का समय बढ़ा दिया गया है, लेकिन मानदेय पहले जैसा ही है। उनका कहना है कि लंबे समय तक इस व्यवस्था में काम करना मुश्किल होगा और जांच पूरी होने के बाद कई कर्मचारी इस जिम्मेदारी से हटने पर विचार कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, चढ़ावे की गणना को लेकर पहले एक पाली की व्यवस्था का ट्रायल भी किया गया था। उस समय बैंक कर्मचारियों के साथ आउटसोर्स कर्मियों को भी लगाया गया था, लेकिन प्रयोग सफल नहीं होने के बाद दोबारा दो पालियों की व्यवस्था लागू कर दी गई।
सूत्रों के अनुसार, जून की तुलना में जुलाई में मंदिर में प्राप्त दान राशि में हल्की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद प्रतिदिन औसतन 18 से 20 लाख रुपये का चढ़ावा मिलने का अनुमान है। हालांकि, इस संबंध में बैंक प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच का सबसे अधिक असर गणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों पर पड़ा है। कुछ आरोपितों की गिरफ्तारी और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ के बाद उनके बीच भय और मानसिक दबाव का माहौल बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि जांच एजेंसियों ने आवश्यकता पड़ने पर उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में कई लोग फिलहाल काम जारी रखे हुए हैं, लेकिन जांच पूरी होने के बाद इस जिम्मेदारी से अलग होने की तैयारी कर रहे हैं। उनके अनुसार, पूरे घटनाक्रम का असर उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है।
