गुरु पूर्णिमा। आज, 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। इसे आषाढ़ पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर के समान स्थान दिया गया है। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए यह दिन गुरुजनों के सम्मान, ज्ञान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे पूजा-पाठ, गुरु वंदना, दान और मंत्र जाप का महत्व और भी बढ़ गया है।
आज का पंचांग (29 जुलाई 2026)
- दिन: बुधवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: वर्षा ऋतु
- मास: आषाढ़
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: पूर्णिमा रात्रि 8:05 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा
- नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा शाम 3:37 बजे तक, फिर श्रवण
- योग: प्रीति योग रात्रि 11:58 बजे तक, इसके बाद आयुष्मान योग
- सूर्योदय: सुबह 6:12 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:17 बजे
- राहुकाल: दोपहर 12:45 बजे से 2:24 बजे तक
- दिशाशूल: उत्तर दिशा
आज के प्रमुख व्रत एवं पर्व
- गुरु पूर्णिमा
- व्यास पूर्णिमा
- आषाढ़ पूर्णिमा
- पूर्णिमा व्रत
- विद्यालाभ योग (प्रातः 4:30 बजे से दोपहर 3:37 बजे तक)
- संन्यासी चतुर्मास प्रारंभ
- 36वीं ऋषिप्रसाद जयंती
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है। गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है। इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
ऐसे करें गुरु पूजन
गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपने गुरु, इष्टदेव या महर्षि वेदव्यास का ध्यान करें। यदि गुरु उपस्थित हों तो उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। फूल, चंदन, अक्षत, दीप और नैवेद्य अर्पित करें तथा श्रद्धापूर्वक गुरु मंत्र या गुरु स्तुति का पाठ करें।
गुरु पूजन मंत्र
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव॥
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।
त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
विद्यालाभ योग का महत्व
आज प्रातः 4:30 बजे से दोपहर 3:37 बजे तक विशेष विद्यालाभ योग रहेगा। इस अवधि में विद्यार्थी मां सरस्वती की आराधना, गुरु पूजन और मंत्र जाप करें तो ज्ञान, स्मरण शक्ति और शिक्षा में सफलता प्राप्त होने की मान्यता है।
आज के विशेष धार्मिक नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा व्रत के दिन सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए। चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के स्थान पर अन्य धातुओं के बर्तनों का उपयोग करना शुभ माना गया है। साथ ही पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना भी पुण्यदायक बताया गया है।
गुरु पूर्णिमा का संदेश
गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। गुरु पूर्णिमा हमें अपने जीवन में मिले हर गुरु—चाहे वे माता-पिता हों, शिक्षक हों या आध्यात्मिक मार्गदर्शक—के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देती है। इस पावन अवसर पर गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर ज्ञान, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।
