छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विशेष PMLA कोर्ट, रायपुर में अभियोजन शिकायत यानी चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट के साथ 99 पेज की समरी और करीब 3,700 पेज के दस्तावेज पेश किए गए हैं।
आपके दिए विवरण में तीन आरोपियों—टामन सिंह सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया—पर विशेष फोकस है। हालांकि, ताजा रिपोर्टों के अनुसार ED की अभियोजन शिकायत में कुल सात आरोपी नामजद हैं।
3700 पेज के दस्तावेज कोर्ट में पेश
ED के वकील सौरभ कुमार पांडे के अनुसार, 99 पेज की अभियोजन शिकायत के साथ करीब 3,700 पेज के सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल किए गए हैं। एजेंसी की जांच कथित पेपर लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है।
यह मामला CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। मूल जांच EOW/ACB की FIR और बाद में CBI की कार्रवाई से आगे बढ़ी, जबकि ED मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रही है।
टामन सोनवानी पर ED के क्या आरोप हैं?
ED का आरोप है कि तत्कालीन CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश रची। एजेंसी के मुताबिक, इसके जरिए रिश्तेदारों और अन्य पसंदीदा अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे पदों पर चयन में लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
ये फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनका अंतिम न्यायिक निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद होगा।
भर्ती नियमों में ‘nephew’ शब्द हटाने का मामला
ED की चार्जशीट में 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में कथित बदलाव का भी उल्लेख है। एजेंसी के मुताबिक, परिवार की परिभाषा से ‘nephew’ शब्द हटाया गया था।
ED का आरोप है कि इस बदलाव से तत्कालीन चेयरमैन टामन सोनवानी के कुछ रिश्तेदारों के चयन का रास्ता आसान हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर की भूमिका की भी जांच इस मामले में की गई है।
उत्कर्ष चंद्राकर और अन्य पर भी आरोप
ED के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर और विकास चंद्राकर ने कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा दिया तथा उनसे पैसे लिए जाने की जांच की गई।
ED ने 1 सितंबर 2026 को रायपुर, दुर्ग और जशपुर में पांच स्थानों पर तलाशी के बाद उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने उस कार्रवाई में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त करने की जानकारी दी थी।
चेतन बोरघरिया की भूमिका और मनी ट्रेल
मामले में अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया भी ED की जांच के दायरे में हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के रूप में भी काम कर चुके हैं।
ED कथित अपराध से हुई आय और उसके मनी ट्रेल की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर प्राप्त रकम किस स्रोत से आई और किन लोगों तक पहुंची।
पहले CBI भी कर चुकी है कार्रवाई
CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के मामले की जांच पहले CBI ने भी की थी। ED की मौजूदा जांच इसी मामले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग एंगल पर केंद्रित है।
पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को ED ने 25 जुलाई 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। ED की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी CGPSC की 2020 और 2021 राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े मामले में हुई थी।
अब अदालत में आगे की प्रक्रिया
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया विशेष PMLA कोर्ट में होगी। चार्जशीट और उसके साथ पेश किए गए हजारों पन्नों के दस्तावेजों में दर्ज आरोपों और साक्ष्यों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत के अंतिम फैसले से पहले आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
