केंद्र सरकार ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है। इस विधेयक में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी (Merchant) UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लागू किया जा सकता है।
हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था का आम UPI उपभोक्ताओं पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति (Person-to-Person) को ₹2,000 या उससे अधिक का UPI भुगतान करता है, तो उस पर किसी अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान नहीं है।
क्या है MDR और किसे देना होगा शुल्क?
MDR (Merchant Discount Rate) वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को देते हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार यह शुल्क व्यापारिक (Merchant) ट्रांजेक्शन पर लागू होगा, न कि आम ग्राहकों पर।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर 0.25% से 0.40% तक MDR लागू करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इसकी अंतिम दर और लागू होने की तारीख पर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है।

रोजमर्रा के भुगतान पर नहीं पड़ेगा असर
जानकारी के अनुसार, दूध, सब्जी, किराना, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी जैसे छोटे भुगतान या सामान्य उपभोक्ता लेनदेन पर इस प्रस्ताव का असर नहीं होगा। यह मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और व्यावसायिक भुगतान से जुड़ा प्रावधान है।
यदि प्रस्ताव लागू होता है तो इसका असर मुख्य रूप से इन पर पड़ सकता है:
- बैंक
- UPI सेवा प्रदाता
- पेमेंट एग्रीगेटर
- बड़े व्यापारी
- BHIM-UPI के माध्यम से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठान
बताया जा रहा है कि अधिकांश UPI लेनदेन ₹2,000 से कम राशि के होते हैं, जबकि बड़ी राशि वाले व्यापारी ट्रांजेक्शन का अनुपात अपेक्षाकृत कम है।
साल 2020 में केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR समाप्त कर दिया था। अब नए संशोधन विधेयक के जरिए कुछ श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर इसे दोबारा लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। अभी यह केवल प्रस्तावित विधेयक है। अंतिम नियम संसद में विधेयक पारित होने और सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही लागू होंगे। वर्तमान में आम उपभोक्ताओं के UPI भुगतान पर किसी नए शुल्क की घोषणा नहीं की गई है।
