देश की राजधानी दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बीच दिल्ली पुलिस में बड़ी संख्या में पद खाली होने का आंकड़ा सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस विभाग में हजारों पद रिक्त हैं, जिनमें कांस्टेबल से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के पद भी शामिल हैं।
आपके दिए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली पुलिस में कुल 92,044 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 9,248 पद खाली हैं। इनमें कांस्टेबल स्तर पर सबसे ज्यादा रिक्तियां हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के मार्च 2026 के राज्यसभा जवाब में दिल्ली पुलिस की कुल स्वीकृत संख्या 97,331 और रिक्तियां 14,140 बताई गई थीं, इसलिए अलग-अलग तारीख और पद-गणना के कारण आंकड़ों में अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल के हजारों पद खाली
दिए गए 30 नवंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस में 50,946 स्वीकृत कांस्टेबल पदों में 4,591 पद खाली हैं। वहीं 23,724 स्वीकृत हेड कांस्टेबल पदों में 3,057 पद रिक्त बताए गए हैं।
सब-इंस्पेक्टर के 8,087 पदों में 1,039 पद खाली हैं। वहीं एएसआई के 7,320 स्वीकृत पदों में 300 पद रिक्त हैं।
इंस्पेक्टर से DCP तक पदों में कमी
वरिष्ठ स्तर पर भी कई पद खाली बताए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली पुलिस में 1,453 स्वीकृत इंस्पेक्टर पदों में 108 पद रिक्त हैं।
इसी तरह एसीपी के 346 पदों में 125, अतिरिक्त DCP के 54 पदों में 15 और DCP की जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) श्रेणी के 60 पदों में 13 पद खाली बताए गए हैं।
हालांकि, गृह मंत्रालय के मार्च 2026 के आधिकारिक आंकड़ों में ACP स्तर पर 152 और Additional DCP तथा उससे ऊपर के स्तर पर 30 रिक्तियां बताई गई थीं। इससे स्पष्ट है कि रिक्तियों के आंकड़े तारीख और कैडर की गणना के अनुसार बदल सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने महिला सुरक्षा पर जताई चिंता
दिल्ली पुलिस में रिक्तियों का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-NCR में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है।
5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि अपराध को होने से रोकना होना चाहिए। कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं को रात के समय भी सुरक्षित महसूस कराने के लिए प्रभावी पुलिसिंग और निगरानी पर जोर दिया।
कोर्ट ने पुलिस से अपराध की आशंका वाले इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाने तथा ऐसे तत्वों के मन में कानून का डर पैदा करने की जरूरत बताई।
गश्त और सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा पर जोर
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में सड़क, पार्क, सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा है।
कोर्ट ने पहले ही दिल्ली-NCR में vulnerability mapping, पुलिस गश्त बढ़ाने, CCTV और स्ट्रीट लाइटिंग की समीक्षा जैसे उपायों पर जोर दिया था। उद्देश्य यह देखना है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इंतजाम केवल कागजों पर न रहें, बल्कि जमीन पर भी प्रभावी तरीके से काम करें।
क्या खाली पदों का असर पुलिसिंग पर पड़ता है
दिल्ली पुलिस में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से पुलिस बल पर काम का दबाव बढ़ने और गश्त, निगरानी तथा त्वरित प्रतिक्रिया जैसी व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की चिंता उठती है। हालांकि, केवल रिक्त पदों के आंकड़े के आधार पर अपराध की किसी एक घटना या महिला सुरक्षा की स्थिति का सीधा कारण तय नहीं किया जा सकता।
गृह मंत्रालय ने अपने आधिकारिक जवाब में बताया था कि दिल्ली पुलिस अपराध-प्रवण इलाकों की पहचान, फुट पेट्रोलिंग, PCR और Emergency Response Vehicles की तैनाती, सक्रिय अपराधियों की निगरानी और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे उपाय कर रही है।
ऐसे में दिल्ली में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल, प्रभावी गश्त, बेहतर निगरानी, पर्याप्त रोशनी और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया जैसे उपायों पर एक साथ काम करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई ने भी अपराध के बाद कार्रवाई से आगे बढ़कर उसे रोकने पर जोर दिया है।
