भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत को लेकर एक बार फिर सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश ट्रेड डील के काफी करीब पहुंच चुके हैं और आने वाले कुछ हफ्तों में समझौता हो सकता है। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी बातचीत में प्रगति की उम्मीद जताई थी।
हालांकि, अभी तक समझौते की अंतिम शर्तों, टैरिफ दरों और आधिकारिक घोषणा की तारीख का खुलासा नहीं किया गया है। ऐसे में ट्रेड डील पर अंतिम मुहर लगने से पहले दोनों देशों के बीच तकनीकी और नीतिगत मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी।
ट्रंप बोले- भारत के साथ समझौते के काफी करीब हैं
मंगलवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप से भारत के साथ व्यापार समझौते की संभावनाओं के बारे में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि वह भारत के साथ समझौता करना चाहते हैं और दोनों देश इसके काफी करीब हैं।
ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि प्रस्तावित समझौता पहले की अपेक्षा अलग स्वरूप का हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि डील में कौन-से बदलाव होंगे या किन व्यापारिक क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाएगा।
भारत और अमेरिका के बीच एक साल से अधिक समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। ट्रंप के ताजा बयान से इस प्रक्रिया में प्रगति की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन समझौते की घोषणा होने तक इसकी शर्तों को अंतिम नहीं माना जा सकता।
मार्को रूबियो ने भी जताई जल्द समझौते की उम्मीद
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं और उम्मीद है कि इसे पूरा करने में महीनों के बजाय कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
रूबियो के मुताबिक, व्यापार समझौते से जुड़ी औपचारिक बातचीत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के नेतृत्व में चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद सीधे तौर पर वार्ता का संचालन नहीं कर रहे हैं, लेकिन समझौते की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसी भी समझौते की घोषणा से पहले उसके सभी प्रावधानों की भाषा और शर्तों को दोनों पक्षों द्वारा अच्छी तरह समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, तकनीकी बारीकियों पर सहमति बनाना समझौते को अंतिम रूप देने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या भारत को मिल सकती हैं बेहतर टैरिफ दरें?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील में टैरिफ यानी आयात शुल्क की शर्तें अहम मुद्दा बनी हुई हैं। जब रूबियो से पूछा गया कि क्या भारत को दूसरे देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ दरें मिल सकती हैं, तो उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था से बेहतर शर्तें हासिल करना होता है।
हालांकि, उन्होंने भारत के लिए प्रस्तावित टैरिफ दरों या किसी विशेष छूट का खुलासा नहीं किया। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि समझौता होने पर भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी आयात शुल्क में कितनी राहत मिल सकती है।
यदि दोनों देश टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर सहमत होते हैं, तो इसका असर द्विपक्षीय व्यापार, निर्यातकों और विभिन्न उद्योगों पर पड़ सकता है। वास्तविक लाभ का आकलन हालांकि समझौते की अंतिम शर्तें सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी दिए सकारात्मक संकेत
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि डील के बड़े मुद्दों पर काम किया जा चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के करीब हैं।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष जताया है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने और समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
हालांकि, इन सकारात्मक बयानों के बावजूद समझौते के सभी विवरण और अंतिम शर्तें सार्वजनिक होना बाकी हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस समझौते से आयात-निर्यात की शर्तों, टैरिफ, बाजार तक पहुंच और विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों में सहयोग पर असर पड़ सकता है।
भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच और प्रतिस्पर्धी टैरिफ दरें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। वहीं, अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के बाजार में व्यापारिक अवसर बढ़ने की संभावना है।
