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कांकेर में नाबालिग के यौन शोषण का आरोप, 44 वर्षीय वैद्यराज गिरफ्तार

कांकेर में नाबालिग के यौन शोषण का आरोप, 44 वर्षीय वैद्यराज गिरफ्तार कांकेर में नाबालिग के यौन शोषण का आरोप, 44 वर्षीय वैद्यराज गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले में उपचार के बहाने 14 वर्षीय नाबालिग के कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। ताड़ोकी थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में 44 वर्षीय वैद्यराज रमेश कुमार पिस्दा पर आरोप लगा है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसे न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, मामले की शिकायत 18 अक्टूबर 2026 को नाबालिग के परिजनों ने दर्ज कराई थी। शिकायत में अप्रैल 2026 से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

उपचार के लिए वैद्यराज के पास ले गए थे परिजन

परिजनों की शिकायत के अनुसार, अप्रैल 2026 में बच्ची की तबीयत खराब होने पर उसे ग्राम आमागांव निवासी वैद्यराज रमेश कुमार पिस्दा के पास उपचार के लिए ले जाया गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान बच्ची को बच्चेदानी में समस्या होने की बात बताई गई और उसे एक ताबीज भी दिया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके बाद बच्ची को कई बार आरोपी के पास ले जाया गया और इस दौरान उसे परिजनों से अलग रखा जाता था। मामले के अन्य पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है।

अंतागढ़ अस्पताल में जांच के दौरान सामने आई गर्भावस्था

अक्टूबर में बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे अंतागढ़ अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय जांच में उसके लगभग पांच महीने की गर्भवती होने की जानकारी सामने आई।

इसके बाद परिजनों ने बच्ची से पूछताछ की। शिकायत के मुताबिक, बच्ची ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे नशीली दवा देकर बेहोश किया और उसके साथ यौन शोषण किया। पुलिस ने इन आरोपों के आधार पर मामले की जांच शुरू की है।

पॉक्सो समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज

ताड़ोकी पुलिस ने अपराध क्रमांक 13/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 64(2)(m), 65(1) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 एवं 6 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने 19 अक्टूबर को आरोपी रमेश कुमार पिस्दा, उम्र 44 वर्ष, निवासी ग्राम आमागांव को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

अंधविश्वास और अप्रमाणित उपचार से रहें सावधान

यह मामला बीमारी के उपचार के नाम पर अंधविश्वास और अप्रमाणित तरीकों पर निर्भर रहने से जुड़े जोखिमों की ओर ध्यान दिलाता है। किसी व्यक्ति के वैद्य या उपचारकर्ता होने का दावा अपने आप में उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं है।

बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सक से जांच और उपचार कराना जरूरी है। खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में बिना चिकित्सकीय सलाह के संदिग्ध उपचार पद्धतियों पर निर्भर रहने से बचना चाहिए।

बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्कता जरूरी

बच्चों की सुरक्षा के मामले में अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उपचार या किसी अन्य बहाने से बच्चे को अनुचित तरीके से अकेले रखने की कोशिश करता है या बच्चा किसी संदिग्ध व्यवहार की जानकारी देता है, तो उसकी बात को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर पुलिस या संबंधित बाल संरक्षण एजेंसियों से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।

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