नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। प्रश्नकाल और शून्यकाल दोनों ही बाधित रहे। लगातार नारेबाजी और विरोध के बीच पीठासीन अधिकारियों को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और अंततः सदन को दोपहर तीन बजे तक स्थगित कर दिया गया।
श्रद्धांजलि के बाद शुरू हुआ हंगामा
सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के छह पूर्व सदस्यों और कतर के पूर्व अमीर के निधन पर शोक व्यक्त किया। सदस्यों ने कुछ क्षण का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि के बाद कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आसन के सामने पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष ने सदस्यों से संसद की गरिमा बनाए रखने और चर्चा के माध्यम से अपनी बात रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
‘न्याय दो’ और ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के लगे नारे
दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसद फिर से वेल में पहुंच गए। इस दौरान “न्याय दो” और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” के नारे लगाए गए।
पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे अपने मुद्दे नियमों के तहत उठाएं और सदन की कार्यवाही चलने दें। उन्होंने बाढ़ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने की भी अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पेश
हंगामे के बीच केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि विपक्ष के शोर-शराबे के कारण इस पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
कई बार स्थगित हुई कार्यवाही
हंगामा लगातार जारी रहने के कारण सदन की कार्यवाही क्रमशः 12:06 बजे, 12:30 बजे, 1 बजे, 2 बजे, 2:30 बजे और अंततः 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
प्रत्येक बार पीठासीन अधिकारियों ने विपक्ष से सहयोग की अपील की, लेकिन विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
संसद परिसर को लेकर भी उठे सवाल
दोपहर बाद विपक्ष के कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान हुई अफरा-तफरी के चलते सांसदों को संसद परिसर में प्रवेश करने से रोका गया और कुछ प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए।
इस पर पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष के निर्देशानुसार किसी भी सांसद को संसद के किसी गेट पर नहीं रोका गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन का एजेंडा सरकार नहीं बल्कि कार्य मंत्रणा समिति तय करती है।
