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नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल दोषी करार, सजा पर फैसला सुरक्षित

नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल दोषी करार, सजा पर फैसला सुरक्षित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल दोषी करार, सजा पर फैसला सुरक्षित

मेरठ: उत्तर प्रदेश के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। दोनों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोपों में दोषसिद्ध किया गया है।

अदालत ने फिलहाल दोषियों की सजा की अवधि पर फैसला नहीं सुनाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 14 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर फैसला सुनाया जाएगा। अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की है, जबकि सजा तय करना अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।

22 से अधिक गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 से अधिक गवाहों के बयान और वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में करीब 126 तारीखों पर सुनवाई हुई।

अदालत में मृतक सौरभ के परिवार के सदस्यों के अलावा घटना से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम, कथित खरीदारी, शव की बरामदगी और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

नीले ड्रम में मिला था शव

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। पुलिस के अनुसार, सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया। ड्रम में सीमेंट का घोल डालकर शव को छिपाने की कोशिश किए जाने की बात जांच में सामने आई थी।

पुलिस जांच के बाद सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। दोनों तब से जेल में हैं।

पीड़ित परिवार ने मांगी मृत्युदंड की सजा

दोषसिद्धि के बाद सौरभ के परिवार और अभियोजन पक्ष की ओर से दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की गई है। अभियोजन ने अदालत में मामले की परिस्थितियों और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अधिकतम सजा की मांग रखी है।

हालांकि, अदालत ने अभी केवल दोषसिद्धि का फैसला सुनाया है। सजा की अवधि पर अंतिम निर्णय 14 अक्टूबर को होना है।

फैसले से पहले जेल में थी सुरक्षा व्यवस्था

फैसले से पहले मेरठ कचहरी परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। जेल प्रशासन के अनुसार, फैसले से पहले मुस्कान पूजा-पाठ में समय बिता रही थी, जबकि साहिल अन्य बंदियों से कम बातचीत कर रहा था। दोनों की अदालत में पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराए जाने की व्यवस्था भी की गई थी।

इस तरह करीब डेढ़ साल से चल रहे चर्चित मामले में अब दोषसिद्धि का चरण पूरा हो गया है और अगली सुनवाई में अदालत दोनों दोषियों की सजा पर फैसला करेगी।

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