पंचायत सचिवों के संविलियन और ट्रांसफर नीति पर मंत्री प्रह्लाद पटेल का बड़ा जवाब

पंचायत सचिवों के संविलियन और ट्रांसफर नीति पर मंत्री प्रह्लाद पटेल का बड़ा जवाब

मध्य प्रदेश के पंचायत सचिवों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के बीच विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार ने उनकी सेवा संबंधी स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने विधानसभा में दिए लिखित जवाब में पंचायत सचिवों के संविलियन, ट्रांसफर नीति और सेवा कैडर से जुड़े कई सवालों का जवाब दिया।

हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में नियमितीकरण (Regularization) की घोषणा नहीं की है। मंत्री ने मुख्य रूप से संविलियन और स्थानांतरण नीति से संबंधित मौजूदा प्रावधानों की जानकारी साझा की।

कांग्रेस विधायक ने उठाया था मामला

बैहर से कांग्रेस विधायक संजय उइके ने विधानसभा में सवाल पूछते हुए जानना चाहा कि क्या ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण सामान्य प्रशासन विभाग की ट्रांसफर नीति 2006 के अनुसार किए जाते हैं। साथ ही उन्होंने सचिवों के संविलियन, उनके सेवा कैडर और ग्राम पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने संबंधी जानकारी भी मांगी।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2006 में ग्राम पंचायत सचिवों के लिए कोई अलग स्थानांतरण नीति लागू नहीं थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि—

  • ग्राम पंचायत सचिव ग्राम पंचायत के कर्मचारी हैं।
  • उनका जिला कैडर बनाया गया है।
  • ग्राम पंचायत सचिव स्थानांतरण नीति 2026 के तहत एक जिले से दूसरे जिले में, संबंधित प्रवर्ग में रिक्त पद होने पर संविलियन का प्रावधान है।
  • शिवपुरी जिले में तीन पंचायत सचिवों का संविलियन किया जा चुका है।

NOC लेने का कोई प्रावधान नहीं

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत सचिव स्थानांतरण नीति 2026 में संविलियन के लिए ग्राम पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने का कोई प्रावधान नहीं है।

उन्होंने बताया कि पंचायत सचिवों के स्थानांतरण सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के अनुसार नहीं, बल्कि पंचायत विभाग की निर्धारित नीति के तहत किए जाते हैं।

नियमितीकरण पर क्या मिला संकेत?

विधानसभा में दिए गए इस जवाब में सरकार ने पंचायत सचिवों के नियमितीकरण (Regularization) को लेकर कोई नई घोषणा या समयसीमा नहीं बताई है। सरकार ने केवल वर्तमान सेवा नियमों, संविलियन प्रक्रिया और स्थानांतरण नीति की स्थिति स्पष्ट की है। ऐसे में नियमितीकरण की मांग को लेकर पंचायत सचिवों की ओर से भविष्य में सरकार के निर्णय पर नजर बनी रहेगी।

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