NASA का Neil Gehrels Swift Observatory एक बार फिर ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली और हिंसक घटनाओं का अध्ययन करने में सक्रिय हो गया है। हालांकि, इस वापसी के साथ मिशन के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। यह पुराना अंतरिक्ष टेलीस्कोप धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर नीचे आ रहा है और NASA के अनुसार इसकी वैज्ञानिक गतिविधियां अक्टूबर के शुरुआती से मध्य हिस्से तक समाप्त हो सकती हैं।
25 सितंबर को NASA ने बताया कि Swift ने अपना तीसरा वैज्ञानिक उपकरण Burst Alert Telescope (BAT) भी दोबारा सक्रिय कर लिया है। इसके साथ ही टेलीस्कोप की अचानक दिखाई देने वाली खगोलीय चमक की दिशा में अपने आप मुड़ने की क्षमता भी बहाल हो गई है।
ब्रह्मांड के शक्तिशाली विस्फोटों का करता है अध्ययन
Swift को 20 नवंबर 2004 को लॉन्च किया गया था। तब से यह मुख्य रूप से गामा-रे बर्स्ट (Gamma-Ray Bursts) का अध्ययन कर रहा है। ये अंतरिक्ष में होने वाली बेहद शक्तिशाली और कम समय में भारी ऊर्जा छोड़ने वाली घटनाएं हैं।
इसके अलावा टेलीस्कोप ब्लैक होल, तारों और अन्य खगोलीय घटनाओं का भी अध्ययन करता है। इसके लिए Swift में तीन प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण काम करते हैं।
- BAT: गामा किरणों का पता लगाता है और अचानक होने वाले शक्तिशाली ब्रह्मांडीय विस्फोटों की जानकारी देता है।
- XRT: घटना से निकलने वाली एक्स-रे का अध्ययन करता है।
- UVOT: पराबैंगनी और दृश्य प्रकाश में घटना के बाद के प्रभावों का निरीक्षण करता है।
सरल शब्दों में कहें तो BAT विस्फोट का पता लगाता है, XRT उसके एक्स-रे आफ्टरग्लो का अध्ययन करता है और UVOT उसके बाद दिखाई देने वाले पराबैंगनी तथा दृश्य प्रकाश को रिकॉर्ड करता है।

पृथ्वी की ओर क्यों गिर रहा है Swift
Swift पृथ्वी की कक्षा में मौजूद है और ऊपरी वायुमंडल पूरी तरह खाली नहीं है। कई सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर भी बेहद पतली वायुमंडलीय गैस मौजूद रहती है, जो अंतरिक्ष यान पर हल्का ड्रैग पैदा करती है। समय के साथ यह ड्रैग उसकी कक्षा को नीचे खींचता है।
हाल के समय में बढ़ी सौर गतिविधि ने भी इस कक्षीय गिरावट को तेज किया है। इसी वजह से NASA ने दिसंबर 2025 में Swift के भविष्य में पृथ्वी की ओर गिरने की तैयारी शुरू कर दी थी।
फरवरी से कम की गई थी वैज्ञानिक गतिविधियां
11 फरवरी 2026 को NASA ने Swift की ज्यादातर वैज्ञानिक गतिविधियां रोक दी थीं। इसका उद्देश्य वायुमंडलीय ड्रैग को कम करना और उस समय को बचाना था, जिसमें टेलीस्कोप को ऊंची कक्षा में ले जाने की कोशिश की जानी थी।
अप्रैल में BAT को भी बंद कर दिया गया था, ताकि ऊर्जा की बचत हो सके और Swift को ऐसी दिशा में रखा जा सके जिससे वायुमंडलीय ड्रैग कम हो।
Swift को बचाने का मिशन क्यों नहीं हो सका सफल
Swift को ऊंची कक्षा में ले जाने के लिए Katalyst Space का रोबोटिक Link अंतरिक्ष यान 3 जुलाई को लॉन्च किया गया था। इसका लक्ष्य Swift के पास पहुंचना, उसे पकड़ना और उसकी कक्षा को ऊपर उठाना था।
हालांकि Link में बाद में नियंत्रण संबंधी समस्याएं सामने आईं। NASA के अनुसार 28 जुलाई तक उसके तीन में से दो रिएक्शन व्हील उपलब्ध नहीं थे और कोल्ड-गैस थ्रस्टर सिस्टम में भी समस्याएं आईं।
इसके बाद 19 अगस्त को NASA ने बताया कि Link अब Swift को पकड़कर उसकी कक्षा नहीं बढ़ाएगा। मिशन को घटाकर रेंडेजवस और नजदीकी संचालन से जुड़ी तकनीक के प्रदर्शन तक सीमित कर दिया गया।
आखिरी दौर में फिर सक्रिय हुआ Swift
रेस्क्यू योजना के आगे नहीं बढ़ पाने के बाद Swift अपनी मौजूदा कक्षा में ही नीचे की ओर बढ़ता रहा। इसके बावजूद वैज्ञानिक उपकरणों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की गई।
26 अगस्त को इसके X-Ray Telescope और Ultraviolet/Optical Telescope को फिर शुरू किया गया। इसके बाद 18 सितंबर को BAT के गामा किरणों का पता लगाने की पुष्टि हुई और 21 सितंबर को ऑटोमेटेड पॉइंटिंग भी बहाल कर दी गई।
इस तरह Swift ने एक बार फिर वैज्ञानिक अवलोकन शुरू कर दिए हैं। हालांकि, उसकी कक्षा लगातार नीचे जा रही है। जब टेलीस्कोप करीब 300 किलोमीटर से नीचे पहुंच जाएगा, तब उसके संचालन को बनाए रखना तेजी से मुश्किल होता जाएगा।
NASA के मौजूदा अनुमान के अनुसार Swift की वैज्ञानिक गतिविधियां अक्टूबर 2026 के शुरुआती से मध्य हिस्से तक समाप्त हो सकती हैं।
