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Share Market Crash: बाजार खुलते ही निवेशकों के डूबे 4 लाख करोड़

24 सितंबर 2026 को शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 700 अंक और Nifty 200 अंक से ज्यादा नीचे Share Market Crash: Sensex-Nifty में भारी गिरावट

Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। Sensex और Nifty दोनों प्रमुख इंडेक्स करीब 1 फीसदी तक टूट गए। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों में BSE की कुल मार्केट कैप से 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गए।

सुबह करीब 10:26 बजे Sensex 700 अंक से अधिक गिरकर 74,050 के आसपास पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी 200 से ज्यादा अंक टूटकर करीब 23,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में ज्यादा दबाव

बाजार में शुरुआती बिकवाली का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर दिखाई दिया। Bajaj Finance के शेयरों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Axis Bank और Bajaj Finserv करीब 3-4 फीसदी तक नीचे आए।

IndiGo, Kotak Mahindra Bank, Asian Paints, HDFC Bank और Trent जैसे शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। व्यापक बाजार में भी दबाव रहा और Nifty Midcap 100 तथा Nifty Smallcap 100 करीब 1 फीसदी नीचे कारोबार करते नजर आए।

मिनटों में 4 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू कम

बाजार में तेज बिकवाली के कारण BSE की कुल मार्केट कैप कुछ ही समय में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घटकर करीब 480 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गई।

यहां यह समझना जरूरी है कि मार्केट कैप में ऐसी गिरावट शेयरों की बाजार कीमत में बदलाव को दर्शाती है। किसी निवेशक का वास्तविक नुकसान तब तय होता है जब वह अपने शेयर कम कीमत पर बेचता है।

शेयर बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल:
अमेरिका की 10 साल की Treasury yield बढ़कर करीब 5.11 फीसदी पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्च स्तर है। ऊंची बॉन्ड यील्ड से डेट इंस्ट्रूमेंट्स की आकर्षकता बढ़ सकती है और इसका असर इक्विटी बाजारों पर पड़ सकता है।

2. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता:
अमेरिका में मजबूत आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी कि Federal Reserve ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। इससे वैश्विक शेयर बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी।

3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल:
Brent crude की कीमत फिर से 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

रुपये पर भी दबाव

तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच भारतीय रुपया भी शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे कमजोर होकर 95.87 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

बाजार में कब आएगी राहत?

बाजार में सुधार का कोई निश्चित समय बताना संभव नहीं है। मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों की दिशा और वैश्विक बाजारों के संकेत आगे की चाल के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

Geojit Financial Services के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, जब तक Brent crude और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड जैसे वैश्विक दबाव बने रहते हैं, तब तक बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

वहीं, बाजार विशेषज्ञों की राय है कि मौजूदा दौर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए बाजार की आगे की दिशा को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालने के बजाय निवेशकों के लिए वैश्विक संकेतकों और कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

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