छत्तीसगढ़ इस समय तीन बड़े कर्मचारी आंदोलनों के कारण प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। जूनियर डॉक्टर, स्वामी आत्मानंद स्कूलों के संविदा शिक्षक और पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और राजस्व कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। मानसून के बीच यह स्थिति आम लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर
राज्य के करीब एक हजार इंटर्न और जूनियर डॉक्टर चरणबद्ध अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की प्रमुख मांगें हैं—
- पूरे देश में समान स्टाइपेंड लागू किया जाए।
- बॉन्ड से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाए।
- एमसीएच कैडर का गठन किया जाए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले डेढ़ वर्ष से सरकार को लगातार ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा दबाव
मानसून के दौरान मलेरिया, वायरल बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में अस्पतालों से इंटर्न डॉक्टरों की अनुपस्थिति मरीजों की देखभाल और उपचार व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना रही है।
आत्मानंद स्कूलों के संविदा शिक्षकों ने भी खोला मोर्चा
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर रायपुर के तूता धरना स्थल पर सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से उत्कृष्ट परिणाम देने के बावजूद उनकी सेवा शर्तों और वेतन संबंधी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- शिक्षा विभाग के अधीन नियमित प्रशासनिक व्यवस्था।
- समान कार्य के लिए समान वेतन।
- हर वर्ष 3 से 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि।
- भविष्य निधि (PF) की सुविधा।
- ड्यूटी के दौरान मृत्यु या दुर्घटना पर 50 लाख रुपये का बीमा।
- मध्य प्रदेश की तर्ज पर संविदा नियम लागू किए जाएं।
