कम नींद लेने वाले हर व्यक्ति को भविष्य में अल्जाइमर या याददाश्त कमजोर होने का खतरा होता है? एक नई वैज्ञानिक रिसर्च इस सवाल का जवाब ‘नहीं’ बताती है। शोध के मुताबिक, खराब नींद का असर हर व्यक्ति के दिमाग पर एक जैसा नहीं पड़ता। इसके पीछे AQP4 (Aquaporin-4) जीन की अहम भूमिका हो सकती है।Alzheimer’s & Dementia जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि AQP4 जीन के अलग-अलग वेरिएंट यह तय कर सकते हैं कि कम नींद किसी व्यक्ति के मस्तिष्क को कितना नुकसान पहुंचाएगी।
AQP4 जीन क्या करता है?
AQP4 जीन मस्तिष्क की एस्ट्रोसाइट (Astrocyte) कोशिकाओं में विशेष जल-चैनल (Water Channels) बनाने का काम करता है। जब हम गहरी नींद में होते हैं, तब यही चैनल सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) के प्रवाह को बेहतर बनाकर दिमाग में जमा अपशिष्ट पदार्थों और विषैले प्रोटीन को बाहर निकालने में मदद करते हैं।विशेषज्ञ इस प्रक्रिया की तुलना मस्तिष्क के प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम (Glymphatic System) से करते हैं।
जीन और नींद का मिला-जुला असर
शोधकर्ताओं ने AQP4 जीन के 13 अलग-अलग वेरिएंट का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में AQP4 का एक विशेष वेरिएंट मौजूद था और जो नियमित रूप से कम नींद लेते थे, उनके मस्तिष्क का ग्रे मैटर अपेक्षाकृत तेजी से कम होता दिखाई दिया।वहीं, इसी जीन के कुछ अन्य वेरिएंट ऐसे भी मिले, जिनमें खराब नींद के बावजूद याददाश्त और मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर अपेक्षाकृत कम असर देखने को मिला।
खराब नींद से दिमाग पर क्या असर पड़ सकता है?
अध्ययन के अनुसार लगातार खराब या अधूरी नींद का संबंध मस्तिष्क की संरचना में बदलाव से भी जुड़ा हो सकता है।
- मस्तिष्क का कुल आकार (Brain Volume) धीरे-धीरे कम हो सकता है।
- दिमाग के वेंट्रिकल्स का आकार बढ़ सकता है, जिसे कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जुड़ा संकेत माना जाता है।
- कुछ लोगों में याददाश्त और संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Function) प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, इन प्रभावों की गंभीरता व्यक्ति के आनुवंशिक गुणों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
भविष्य में बदल सकता है इलाज का तरीका
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज Precision Health की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। भविष्य में डॉक्टर मरीज की आनुवंशिक जांच (Genetic Testing) के आधार पर यह तय कर सकेंगे कि उसे अल्जाइमर के जोखिम को कम करने के लिए कितनी नींद, कैसा लाइफस्टाइल और किस तरह की स्वास्थ्य रणनीति अपनानी चाहिए।
अच्छी नींद अब भी सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जीन को बदलना संभव नहीं है, लेकिन नींद की आदतों में सुधार हर व्यक्ति के हाथ में है। नियमित समय पर सोना, 7–9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना, देर रात स्क्रीन का कम इस्तेमाल करना और तनाव को नियंत्रित रखना मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।हालांकि यह शोध व्यक्तिगत जोखिम को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि कम नींद सुरक्षित है। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद आज भी स्वस्थ मस्तिष्क और बेहतर याददाश्त के लिए सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक मानी जाती है।
