आज का पंचांग | 28 जुलाई 2026 (मंगलवार)

आज का पंचांग | 28 जुलाई 2026 (मंगलवार)

रायपुर, छत्तीसगढ़ (स्थानीय समयानुसार)

🌅 दिनांक: 28 जुलाई 2026, मंगलवार
🗓️ विक्रम संवत: 2083
🗓️ शक संवत: 1948
☀️ अयन: दक्षिणायन
🌧️ ऋतु: वर्षा ऋतु
🌿 मास: आषाढ़
🌙 पक्ष: शुक्ल पक्ष


📌 पंचांग विवरण

  • तिथि: शुक्ल चतुर्दशी शाम 06:18 बजे तक, तत्पश्चात पूर्णिमा
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा दोपहर 01:11 बजे तक, तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा
  • योग: विष्कंभ रात्रि 11:33 बजे तक, तत्पश्चात प्रीति योग
  • करण: वणिज के बाद विष्टि (भद्रा)

🌞 सूर्य एवं चंद्रमा (रायपुर)

  • 🌅 सूर्योदय: सुबह 05:38 बजे
  • 🌇 सूर्यास्त: शाम 06:44 बजे
  • 🌙 चंद्रोदय: शाम 06:48 बजे (लगभग)
  • 🌑 चंद्रास्त: प्रातः 04:54 बजे (29 जुलाई) (लगभग)

⏰ शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • 🚫 राहुकाल: दोपहर 03:24 बजे से शाम 05:02 बजे तक
  • यमगण्ड काल: सुबह 08:50 बजे से 10:28 बजे तक
  • गुलिक काल: दोपहर 12:06 बजे से 01:45 बजे तक
  • 🌿 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से 12:37 बजे तक
  • 🌄 ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:10 बजे से 04:53 बजे तक
  • 👉 दिशाशूल: उत्तर दिशा

🛕 आज का विशेष महत्व

📚 विद्यालाभ योग

28 जुलाई को दोपहर 01:11 बजे से रात्रि 11:45 बजे तक विद्यालाभ योग रहेगा। यह योग विशेष रूप से गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि अमावस्यांत मास मानने वाले राज्यों में मान्य माना गया है।

📿 विद्यालाभ मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिह्वाग्रे वद वद।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा॥

➡️ इस अवधि में 108 बार मंत्र जप करें।
➡️ रात्रि 11:00 से 12:00 बजे के बीच लाल चंदन से जीभ पर “ह्रीं” लिखने की परंपरा का उल्लेख सनातन पंचांग में किया गया है। मान्यता है कि इससे विद्या, वाणी और बुद्धि की प्राप्ति होती है।


🌕 गुरुपूर्णिमा की पूर्व संध्या

आज चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु के दर्शन, सत्संग, मानस-पूजन एवं गुरु वंदना का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा भाव से गुरु का पूजन करने पर वर्षभर के व्रत एवं पुण्य का फल प्राप्त होता है।


⚠️ आज क्या करें, क्या न करें

✅ करें

  • भगवान शिव एवं भगवान विष्णु का पूजन करें।
  • विद्या प्राप्ति के लिए मां सरस्वती के मंत्र का जप करें।
  • गुरुजनों का सम्मान करें।
  • सात्विक भोजन एवं संयम का पालन करें।

❌ न करें

  • चतुर्दशी एवं पूर्णिमा के दिन तिल के तेल का सेवन और शरीर पर प्रयोग वर्जित माना गया है।
  • स्त्री-सहवास से परहेज करने का उल्लेख पुराणों में मिलता है।
  • चातुर्मास में तांबे एवं कांसे के पात्रों का उपयोग न करने तथा पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन को पुण्यदायक बताया गया है।

📖 पंचांग स्रोत

सनातन पंचांग (मूल धार्मिक विवरण)
समय समायोजन: रायपुर, छत्तीसगढ़ के स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार।

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