आज 28 सितंबर 2026, सोमवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। आज द्वितीया श्राद्ध किया जाएगा। तिथि शाम 7:13 बजे तक रहेगी, इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी। रेवती नक्षत्र सुबह 10:16 बजे तक रहेगा और इसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।
पंचांग के अनुसार आज दक्षिणायन और शरद ऋतु है। गुजरात और महाराष्ट्र में इस समय भाद्रपद मास माना जाता है।
आज का पंचांग
- दिन: सोमवार
- तारीख: 28 सितंबर 2026
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: आश्विन
- गुजरात-महाराष्ट्र: भाद्रपद
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: द्वितीया शाम 7:13 बजे तक, फिर तृतीया
- नक्षत्र: रेवती सुबह 10:16 बजे तक, फिर अश्विनी
- योग: ध्रुव सुबह 8:53 बजे तक, फिर व्याघात
- सूर्योदय: सुबह 6:30 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:28 बजे
- राहुकाल: सुबह 7:59 से 9:29 बजे तक
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
आज द्वितीया श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। आज द्वितीया तिथि होने के कारण द्वितीया श्राद्ध का दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और अन्य परंपरागत कर्म किए जाते हैं।
धार्मिक परंपरा में श्राद्ध के दौरान भोजन और पूजा से जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं। इनमें तिथि के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज की मान्यता शामिल है।
द्वितीया तिथि पर क्या कहा गया है
पंचांग में दिए गए धार्मिक संदर्भ के अनुसार द्वितीया तिथि पर बृहती यानी छोटे बैंगन या कटेहरी के सेवन को निषिद्ध बताया गया है। यह मान्यता ब्रह्मवैवर्त पुराण के संदर्भ से जुड़ी बताई गई है।
इसी तरह चतुर्मास से संबंधित परंपराओं में पात्र और भोजन से जुड़े कुछ नियम बताए जाते हैं। इन्हें धार्मिक मान्यता और परंपरा के रूप में देखा जाता है।
29 सितंबर को भरणी श्राद्ध
आने वाले 29 सितंबर 2026, मंगलवार को भरणी नक्षत्र होने के कारण भरणी श्राद्ध का उल्लेख पंचांग में किया गया है। धार्मिक मान्यताओं में भरणी नक्षत्र का संबंध यमराज से माना जाता है और इसी वजह से इस दिन किए जाने वाले श्राद्ध को विशेष महत्व दिया जाता है।
पंचांग के अनुसार भरणी नक्षत्र में श्राद्ध करने से पितरों की सद्गति और श्राद्धकर्ता को उत्तम आयु मिलने की धार्मिक मान्यता है। काले तिल और गाय के दान को भी इस दिन से जुड़ी परंपराओं में बताया गया है।
29 सितंबर को अंगारकी चतुर्थी
29 सितंबर 2026 मंगलवार को शाम 5:09 बजे से 30 सितंबर के सूर्योदय तक चतुर्थी तिथि रहने की जानकारी दी गई है। इस वजह से इस दिन अंगारकी मंगलवारी चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी का पर्व बताया गया है।
पंचांग में चंद्रोदय का समय रात 7:56 बजे दिया गया है। संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर गणेश पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने की धार्मिक परंपरा है।
संकष्टी चतुर्थी पर गणेश पूजा
धार्मिक परंपरा के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा, जप और ध्यान किया जाता है। पंचांग में गणेश जी के छह मंत्रों का भी उल्लेख किया गया है:
- ॐ सुमुखाय नमः
- ॐ दुर्मुखाय नमः
- ॐ मोदाय नमः
- ॐ प्रमोदाय नमः
- ॐ अविघ्नाय नमः
- ॐ विघ्नकरत्र्येय नमः
इन मंत्रों और उनसे जुड़ी फलश्रुतियों को धार्मिक मान्यताओं के रूप में बताया गया है।
