आज का पंचांग 24 सितंबर 2026: गुरुवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। यह तिथि रात 11:18 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी शुरू होगी। आज प्रदोष व्रत है। वहीं 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी।
सनातन पंचांग के अनुसार, आज धनिष्ठा नक्षत्र सुबह 10:35 बजे तक रहेगा, इसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू होगा। धृति योग शाम 3:55 बजे तक रहेगा और उसके बाद शूल योग लगेगा।
आज का पंचांग
- दिन: गुरुवार, 24 सितंबर 2026
- विक्रम संवत: 2083 (गुजरात के अनुसार 2082)
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: त्रयोदशी रात 11:18 बजे तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र: धनिष्ठा सुबह 10:35 बजे तक, फिर शतभिषा
- योग: धृति शाम 3:55 बजे तक, फिर शूल
- राहुकाल: दोपहर 2:01 से शाम 3:32 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:32 बजे
- दिशाशूल: दक्षिण दिशा
- व्रत-पर्व: प्रदोष व्रत
त्रयोदशी से जुड़ी धार्मिक मान्यता
सनातन पंचांग में दी गई धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रयोदशी तिथि पर बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसे ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्म खंड के श्लोकों से जोड़ा गया है।
इसी तरह चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के बजाय अन्य धातुओं के पात्र इस्तेमाल करने की बात कही गई है। स्कंद पुराण के संदर्भ में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करने को भी धार्मिक रूप से पुण्यकारी बताया गया है। ये बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 25 सितंबर, शुक्रवार को है। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और संकटों से रक्षा की कामना के साथ अनंतसूत्र धारण किया जाता है।
मान्यता है कि पांडवों के वनवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। इसके बाद युधिष्ठिर ने भाइयों और द्रौपदी के साथ इस व्रत का पालन किया।
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि
धार्मिक परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाला व्यक्ति सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेता है। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर कलश स्थापित कर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र रखा जाता है।
पूजा में 14 गांठों वाला अनंतसूत्र रखा जाता है। भगवान विष्णु और अनंतसूत्र की पूजा के बाद मंत्रोच्चार के साथ इसे धारण किया जाता है। परंपरा के अनुसार पुरुष दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में अनंतसूत्र बांधती हैं।
पूजन के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित किया जाता है और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है।
अनंत व्रत की कथा
धार्मिक कथा के अनुसार सत्ययुग में सुमन्तु नाम के एक मुनि थे। उनकी पुत्री शीला का विवाह कौण्डिन्य मुनि से हुआ था। एक बार शीला ने कुछ महिलाओं को अनंत भगवान की पूजा करते देखा और उनसे व्रत का महत्व जाना।
इसके बाद शीला ने अनंत भगवान की पूजा कर अनंतसूत्र धारण किया। मान्यता के अनुसार इसके बाद उनके घर में सुख-समृद्धि आई।
कथा में आगे बताया गया है कि कौण्डिन्य मुनि ने अनंतसूत्र को लेकर भ्रमवश उसे तोड़कर जला दिया। इसके बाद उनके जीवन में आर्थिक कठिनाइयां आईं। उन्होंने भगवान अनंत से क्षमा मांगने के लिए तप किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने उन्हें 14 वर्षों तक अनंत व्रत करने का निर्देश दिया। कौण्डिन्य मुनि ने इस व्रत का पालन किया और उनकी समृद्धि वापस प्राप्त हुई।
यह कथा धार्मिक परंपरा और मान्यता का हिस्सा है।

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