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₹1 लाख की FD पर मिलेगा इतना ब्याज, जानें कैलकुलेशन

FD Interest Calculator से 1 लाख रुपये की 10 साल की FD का ब्याज और मैच्योरिटी कैलकुलेशन 1 लाख की FD पर 10 साल में कितना मिलेगा रिटर्न

अगर आपके पास 1 लाख रुपये की एकमुश्त रकम है और आप इसे लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD एक विकल्प हो सकता है। FD में निवेश करने से पहले केवल ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि ब्याज किस तरह जुड़ता है और 10 साल की अवधि में आपकी जमा रकम कितनी हो सकती है।

मान लीजिए आप 1 लाख रुपये की क्युमुलेटिव FD 10 साल के लिए करते हैं और बैंक सालाना 7% ब्याज देता है। अगर ब्याज की तिमाही कंपाउंडिंग होती है और उसे FD में ही जोड़ा जाता है, तो 10 साल बाद रकम करीब 1.99 लाख रुपये हो सकती है।

यानी करीब 99,500 रुपये का ब्याज अर्जित हो सकता है।

6% ब्याज पर 10 साल बाद रकम

अगर 1 लाख रुपये की FD पर सालाना 6% ब्याज मिलता है और तिमाही कंपाउंडिंग होती है, तो 10 साल बाद रकम करीब 1.82 लाख रुपये हो सकती है।

इसमें लगभग 81,900 रुपये ब्याज शामिल होगा।

7% ब्याज पर इतना मिलेगा

सालाना 7% ब्याज की स्थिति में 1 लाख रुपये की रकम 10 साल बाद करीब 1.99 लाख रुपये हो सकती है।

इसमें लगभग 99,400-99,500 रुपये का ब्याज शामिल होगा।

7.5% ब्याज पर रकम इतनी होगी

अगर FD पर सालाना 7.5% ब्याज मिलता है, तो तिमाही कंपाउंडिंग के साथ 10 साल बाद 1 लाख रुपये करीब 2.10 लाख रुपये हो सकते हैं।

इस स्थिति में ब्याज से लगभग 1.10 लाख रुपये की कमाई होगी।

8% ब्याज पर 10 साल बाद करीब 2.21 लाख

सालाना 8% ब्याज मिलने पर 1 लाख रुपये की FD की मैच्योरिटी रकम 10 साल बाद करीब 2.21 लाख रुपये हो सकती है। इसमें ब्याज की राशि करीब 1.21 लाख रुपये होगी।

सालाना ब्याज 10 साल बाद अनुमानित रकम अनुमानित ब्याज
6% ₹1.82 लाख ₹81,900
7% ₹1.99 लाख ₹99,500
7.5% ₹2.10 लाख ₹1.10 लाख
8% ₹2.21 लाख ₹1.21 लाख

ध्यान दें: ये आंकड़े 1 लाख रुपये की शुरुआती जमा, 10 साल की अवधि और तिमाही कंपाउंडिंग के अनुमान पर आधारित हैं। वास्तविक मैच्योरिटी बैंक की ब्याज गणना और लागू शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है।

कंपाउंडिंग से ऐसे बढ़ता है रिटर्न

क्युमुलेटिव FD में ब्याज आमतौर पर नियमित रूप से आपके सेविंग अकाउंट में नहीं आता। इसके बजाय ब्याज FD में जुड़ता रहता है। अगली अवधि में ब्याज केवल मूल रकम पर नहीं, बल्कि पहले से जुड़े ब्याज पर भी मिलता है।

इसी प्रक्रिया को कंपाउंडिंग कहा जाता है। निवेश जितने लंबे समय तक बना रहता है, कंपाउंडिंग का प्रभाव उतना अधिक दिखाई दे सकता है।

इसलिए FD चुनते समय ब्याज दर के साथ यह भी देखना जरूरी है कि बैंक ब्याज की गणना और कंपाउंडिंग किस अंतराल पर करता है।

हर महीने ब्याज चाहिए तो अलग विकल्प

अगर आपका उद्देश्य FD से नियमित आय हासिल करना है, तो मंथली इंटरेस्ट पेआउट FD पर विचार किया जा सकता है। इसमें FD से मिलने वाला ब्याज तय अंतराल पर आपके बैंक खाते में आ सकता है।

इस स्थिति में ब्याज मूल रकम में जुड़कर कंपाउंड नहीं होता। इसलिए 10 साल बाद मिलने वाली मैच्योरिटी राशि क्युमुलेटिव FD से अलग हो सकती है। इसके बदले निवेशक को अवधि के दौरान नियमित ब्याज मिलता रहता है।

10 साल की FD कराने से पहले इन बातों पर ध्यान दें

लंबी अवधि के लिए FD कराने से पहले सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। बैंक की FD अवधि, कंपाउंडिंग का तरीका, प्रीमैच्योर निकासी के नियम और समय से पहले FD बंद करने पर मिलने वाले ब्याज की जानकारी जरूर लें।

इसके अलावा FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ सकता है। आपकी लागू टैक्स व्यवस्था और आय के आधार पर टैक्स देनदारी अलग हो सकती है। इसलिए निवेश का आकलन करते समय केवल मैच्योरिटी रकम नहीं, बल्कि टैक्स के बाद मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

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