पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी। वहीं, शारदीय नवरात्रि का आरंभ रविवार, 11 अक्टूबर से होगा।
10 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: शनिवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: शरद
- मास: आश्विन
- पक्ष: कृष्ण
- तिथि: अमावस्या रात 9:19 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा
- नक्षत्र: हस्त रात 9:42 बजे तक, इसके बाद चित्रा
- योग: इंद्र रात 10:02 बजे तक, इसके बाद वैधृति
- राहुकाल: सुबह 9:29 से 10:57 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:33 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:17 बजे
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध का महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस अवसर पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, वे भी इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना, अन्न और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य करना पुण्यकारी माना जाता है।
पितरों के निमित्त क्या कर सकते हैं
सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार ये कार्य कर सकते हैं:
- पितरों के निमित्त विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करना।
- जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना या अन्न दान करना।
- गाय, कुत्ते, पक्षियों और अन्य जीवों को उनकी जरूरत के अनुरूप भोजन या पानी देना।
- परिवार के दिवंगत सदस्यों का स्मरण कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी योग्य पुरोहित से श्राद्ध की विधि और तर्पण के बारे में मार्गदर्शन लेना।
अमावस्या पर हवन और दान की परंपरा
कुछ धार्मिक परंपराओं में अमावस्या के दिन घर में हवन करने की भी मान्यता है। इसके लिए काले तिल, जौ, चावल, घी, चंदन और अन्य हवन सामग्री का उपयोग किया जाता है। परिवार के सदस्य कुलदेवता, ग्रामदेवता और अन्य आराध्य देवताओं के निमित्त आहुति अर्पित करते हैं।
हवन करते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और विधि की जानकारी न होने पर जानकार व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही अनुष्ठान करना चाहिए। धार्मिक कर्मकांड में खर्च करना आवश्यक नहीं है; श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा, दान या सेवा कर सकते हैं।
चतुर्मास से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी कुछ परंपराओं में चतुर्मास के दौरान तांबे और कांसे के पात्रों के उपयोग से परहेज करने तथा पलाश के पत्तों पर भोजन करने का उल्लेख मिलता है। इसी तरह कुछ धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या के दिन विशेष संयम और सात्त्विक आचरण पर जोर दिया जाता है।
इन नियमों का पालन व्यक्ति अपनी पारिवारिक परंपरा और आस्था के अनुसार कर सकता है।
11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
सर्वपितृ अमावस्या के अगले दिन, रविवार 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि शुरू होगी। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु पूजा-पाठ, व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन और गरबा जैसे पारंपरिक आयोजनों में भाग लेते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिनों का व्रत रखते हैं, जबकि अन्य अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में नवरात्रि को शक्ति उपासना, आत्मसंयम और साधना का विशेष समय माना गया है। इस दौरान मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारियां की जाती हैं।
