काम के दबाव और पानी की कमी के कारण कुछ महिलाओं को थकान, सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में व्रत से पहले तैयारी करना, काम के बीच आराम लेना और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करना जरूरी है।
सरगी में शामिल करें पौष्टिक चीजें
करवाचौथ पर सूर्योदय से पहले खाई जाने वाली सरगी का विशेष महत्व है। अगर व्रत के दिन आपको ऑफिस भी जाना है, तो सरगी में दूध, फल, दही, सूखे मेवे, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल कर सकती हैं।
सिर्फ मिठाई या तली-भुनी चीजों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित भोजन करना बेहतर है। सरगी के समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, हालांकि इससे पूरे दिन निर्जला व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।
ऑफिस में काम के बीच लें आराम
व्रत के दौरान लगातार काम करने से थकान बढ़ सकती है। इसलिए काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें, आंखों को आराम दें और संभव हो तो कुछ देर शांत जगह पर बैठें। अधिक शारीरिक मेहनत वाले कामों को कम रखने की कोशिश करें।
अगर चक्कर आएं, सिर घूमने लगे या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत बैठ जाएं और किसी सहकर्मी को बताएं। लक्षण गंभीर होने पर चिकित्सा सहायता लें। सेहत खराब होने के बावजूद काम जारी रखने का दबाव न बनाएं।
डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पहले से करें तैयारी
निर्जला व्रत में पानी नहीं पिया जाता, इसलिए शरीर में पानी की कमी होने का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर गर्म मौसम, लंबे समय तक बाहर रहने या अधिक भागदौड़ करने से परेशानी बढ़ सकती है।
व्रत से पहले पर्याप्त पानी पिएं और चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन करने से बचें। ऑफिस में जहां संभव हो, तेज धूप और अनावश्यक भागदौड़ से बचें। ध्यान रखें कि सरगी के समय पानी पीना हर व्यक्ति के लिए पूरे दिन पर्याप्त हाइड्रेशन की गारंटी नहीं है।
काम का दबाव कम रखें और पूरी नींद लें
करवाचौथ से एक रात पहले पर्याप्त नींद लें। देर रात तक जागने से अगले दिन थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
ऑफिस के जरूरी काम पहले से व्यवस्थित कर लें। संभव हो तो व्रत वाले दिन भारी काम और अधिक भागदौड़ कम रखें। इससे दिनभर की थकान घटाने में मदद मिल सकती है।
किन महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए
करवाचौथ का व्रत रखने से पहले स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है। डायबिटीज, किडनी की बीमारी या बार-बार चक्कर आने की परेशानी से जूझ रही महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी चिकित्सकीय सलाह के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
व्रत खोलते समय धीरे-धीरे पानी पिएं और हल्का, संतुलित भोजन करें। एक साथ बहुत ज्यादा तला-भुना या भारी भोजन खाने से बचें। अगर बेहोशी, भ्रम, तेज चक्कर या गंभीर कमजोरी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
