4 मई 2023 को जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन
राज्य शासन ने 4 मई 2023 को व्यापमं के माध्यम से सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें बस्तर और सरगुजा संभाग सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए पद निर्धारित किए गए थे। भर्ती में 29 नवंबर 2012 की आरक्षण अधिसूचना के आधार पर तैयार मॉडल रोस्टर लागू किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने इसी व्यवस्था को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि जिस आरक्षण अधिसूचना को अदालत पहले ही निरस्त कर चुकी है, उसके आधार पर नई भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
2012 की आरक्षण व्यवस्था पर पहले भी आया था फैसला
मामले में याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के 19 सितंबर 2022 के फैसले का हवाला दिया। उस फैसले में राज्य सरकार की 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के तहत लागू 58 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को निरस्त कर दिया गया था।
इस व्यवस्था में अनुसूचित जाति (SC) के लिए 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 32 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया था।
इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई 2023 को लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट के समक्ष विवाद इस बात पर था कि क्या इस अंतरिम आदेश के आधार पर पहले निरस्त हो चुकी आरक्षण व्यवस्था को नई भर्ती में लागू किया जा सकता है।
ST वर्ग के लिए 60 प्रतिशत से अधिक पद आरक्षित होने का दावा
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती के रोस्टर में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण को लेकर भी आपत्ति जताई थी। उनके अनुसार, E-कैडर के 1,113 पदों में से 698 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित थे, जो कुल पदों का लगभग 62.71 प्रतिशत है।
इसी तरह, T-कैडर के 4,659 पदों में से 3,105 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने का दावा किया गया था। यह कुल पदों का लगभग 66.64 प्रतिशत था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस तरह के रोस्टर से अनारक्षित और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए उपलब्ध पदों पर असर पड़ता है। अदालत में आरक्षण की वैधता और पहले के न्यायिक फैसलों के प्रभाव को लेकर यही प्रमुख मुद्दा रहा।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक नियुक्तियों पर रहेगा असर
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल सेवा से नहीं हटाया जाएगा। उनकी नियुक्तियां और भविष्य की पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।
इसका अर्थ है कि मौजूदा शिक्षकों की सेवाओं पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन उनकी नियुक्तियों की अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित हो सकती है।
नई भर्ती और आरक्षण व्यवस्था पर ये होगा असर
हाईकोर्ट के फैसले में 4 मई 2023 के भर्ती विज्ञापन को उस सीमा तक निरस्त किया गया है, जहां 2012 की निरस्त आरक्षण अधिसूचना और उससे जुड़े मॉडल रोस्टर को आधार बनाया गया था। इसे पूरे शिक्षक भर्ती तंत्र या पहले से नियुक्त सभी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश नहीं समझना चाहिए।
आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले और राज्य शासन की ओर से उठाए जाने वाले कानूनी कदमों पर निर्भर करेगी। भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों और वर्तमान शिक्षकों के लिए आदेश की विस्तृत शर्तों को समझना जरूरी है।
