महिला योग प्रशिक्षक ने लगाए थे उत्पीड़न के आरोप
यह मामला बिलासपुर निवासी एक महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत से जुड़ा है, जो पुलिस विभाग में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी हैं। महिला ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक के समक्ष शिकायत देकर तत्कालीन IG रतनलाल डांगी पर वर्ष 2017 से 2025 के बीच कथित तौर पर शारीरिक, मानसिक और अन्य तरह से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे।
शिकायत के बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रारंभिक जांच कराई। राज्य शासन की ओर से अदालत में बताया गया कि प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए और इसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। मार्च 2026 में डांगी को निलंबित किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। डांगी ने आरोपों को खारिज किया है।
20 अप्रैल को जारी किया गया आरोप पत्र
14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि डांगी के खिलाफ 20 अप्रैल 2026 को विभागीय आरोप पत्र जारी किया गया था। यह कार्रवाई अखिल भारतीय सेवा के आचरण और अनुशासन संबंधी नियमों के तहत की जा रही है।
आरोप पत्र जारी होना विभागीय जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे आरोपों पर अंतिम निर्णय या किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
पीड़िता की आपत्ति के बाद पारुल माथुर को जिम्मेदारी
विभागीय जांच की व्यवस्था में अधिकारियों की भूमिका को लेकर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई थी। पहले IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने का प्रस्ताव था। शिकायतकर्ता ने संवेदनशील मामले में महिला अधिकारी को यह जिम्मेदारी दिए जाने की मांग की।
इसके बाद गृह विभाग ने 29 सितंबर 2026 को जारी आदेश में बदलाव करते हुए प्रशांत अग्रवाल की जगह IPS पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया।
प्रस्तुतकर्ता अधिकारी विभागीय जांच में शासन की ओर से संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करता है। वहीं, जांच अधिकारी विभागीय कार्यवाही के तहत मामले की जांच करता है।
दीपांशु काबरा बने जांच अधिकारी
राज्य शासन के अनुसार, ADG दीपांशु विजय काबरा को विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। संशोधित आदेश में उनकी भूमिका बरकरार रखी गई, जबकि प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी पारुल माथुर को सौंपी गई।
हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण किया
शिकायतकर्ता ने प्रारंभिक जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत ने राज्य शासन के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से आरोप पत्र जारी होने और विभागीय जांच के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की जानकारी दी गई।
इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों पर अंतिम फैसला सुना दिया है। विभागीय जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्ष अलग चरण हैं।
फिलहाल, रतनलाल डांगी के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहने की जानकारी सामने आई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
