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कैंसर की 543 दवा ब्रांडों के दाम घटे, 9 नवंबर से लागू होंगी नई कीमतें

कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर की 543 दवा ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में संशोधन किया है। जारी सूची के मुताबिक, इनमें से 397 ब्रांड की कीमतें घटाई गई हैं। संशोधित दरें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।

जारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 73 प्रतिशत दवा ब्रांडों के दाम कम किए गए हैं। इनमें 217 ब्रांड ऐसे हैं, जिनकी कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की कटौती हुई है। वहीं, 97 ब्रांडों के दाम 70 प्रतिशत से ज्यादा और 50 ब्रांडों के दाम 80 प्रतिशत से अधिक घटाए गए हैं। इसके अलावा, पांच दवा ब्रांडों की कीमतों में 90 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है।

543 कैंसर दवा ब्रांडों की कीमतों में संशोधन

NPPA की ओर से जारी सूची में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 दवा ब्रांडों की संशोधित MRP शामिल है। कीमतों में कटौती से संबंधित दवाओं का इस्तेमाल करने वाले मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी मरीज को कितनी बचत होगी, यह संबंधित दवा के ब्रांड, पैक साइज और पहले लागू कीमत पर निर्भर करेगा।

नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। मरीजों और उनके परिजनों को दवा खरीदते समय संशोधित MRP की जांच करनी चाहिए।

137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं पर भी फैसला

NPPA ने 17 अक्टूबर 2026 को 137 ऐसी कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने का फैसला किया था, जो निर्धारित मूल्य नियंत्रण सूची में शामिल नहीं हैं। इस कदम का उद्देश्य दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना और कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाने में मदद करना है।

इन दवाओं में कैंसर के विभिन्न प्रकारों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली Denosumab तथा अलग-अलग प्रकार के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली Bevacizumab जैसी दवाएं भी शामिल हैं। कुछ दवाओं का उपयोग इम्यूनोथेरेपी सहित विभिन्न उपचार प्रक्रियाओं में किया जाता है।

दवाओं की ऊंची कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल

कैंसर की दवाओं की कीमतों में संशोधन ऐसे समय हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट में दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली रकम के बीच अंतर का मुद्दा उठा। 27 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक कैंसर इंजेक्शन का उदाहरण रखा गया। बताया गया कि मेडिकल डिस्ट्रीब्यूटर से करीब 11,000 रुपये में खरीदे गए इंजेक्शन के लिए निजी अस्पताल में मरीज को 1.3 लाख रुपये का बिल दिया गया था।

इस अंतर पर अदालत ने सवाल उठाए। वहीं, NPPA ने 17 अक्टूबर को 137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया था। इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर को 543 दवा ब्रांडों की संशोधित MRP की सूची जारी की गई।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कीमतों में कटौती का आधिकारिक उद्देश्य अत्यधिक ट्रेड मार्जिन पर अंकुश लगाना और कैंसर का इलाज किफायती बनाना है। इसे सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का सीधा परिणाम बताने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मरीजों को कैसे मिलेगी राहत?

कैंसर का इलाज कई बार लंबे समय तक चलता है और इस दौरान दवाओं पर काफी खर्च होता है। ऐसे में दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतों में कमी से मरीजों और उनके परिवारों का आर्थिक बोझ कम हो सकता है।

हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि मरीज कौन-सी दवा इस्तेमाल कर रहा है और उसकी पुरानी तथा संशोधित कीमत में कितना अंतर है। NPPA की ओर से जारी 543 ब्रांडों की सूची के आधार पर संबंधित दवा की नई MRP की जानकारी ली जा सकती है। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। इसके बाद संबंधित दवा ब्रांडों की बिक्री नई निर्धारित MRP के अनुसार की जानी चाहिए।

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