धर्म डेस्क: करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन चांद निकलने के बाद उसकी पूजा और अर्घ्य देने की रस्म पूरी की जाती है। इसके बाद महिलाएं परंपरा के अनुसार अपना व्रत खोलती हैं। ऐसे में चंद्रोदय का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त जानना जरूरी होता है।
करवा चौथ 2026 के लिए दिल्ली-NCR, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, श्रीनगर और कन्याकुमारी समेत प्रमुख शहरों के चंद्रोदय समय की जानकारी पंचांग के आधार पर देखी जा सकती है। हालांकि, मौसम में बादल या अन्य परिस्थितियों के कारण चंद्रमा के वास्तविक दर्शन में देरी हो सकती है।
Karwa Chauth Puja Muhurat: पूजा का शुभ समय
करवा चौथ पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त, चतुर्थी तिथि और व्रत की अवधि का विशेष महत्व होता है। महिलाएं परंपरा के अनुसार निर्धारित मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती हैं।
पूजा के समय और चतुर्थी तिथि की सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग देखना चाहिए। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय में अंतर होने के कारण धार्मिक गतिविधियों के समय में भी बदलाव हो सकता है।
Karwa Chauth Moonrise Time: प्रमुख शहरों में कब निकलेगा चांद?
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं अपने शहर के चंद्रोदय का समय जानना चाहती हैं।
दिल्ली-NCR, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, श्रीनगर और कन्याकुमारी समेत प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन शहरों के चंद्रोदय का सटीक समय सूचीबद्ध नहीं है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के पंचांग या विश्वसनीय स्थानीय स्रोत से समय की पुष्टि करनी चाहिए।
Karwa Chauth Vrat Kaise Kholen: चांद देखने के बाद क्या करें?
करवा चौथ की परंपरा में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा की रस्में पूरी करने के बाद व्रत खोला जाता है। कई परिवारों में महिलाएं छलनी से पहले चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है।
व्रत खोलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है:
- सबसे पहले चंद्रमा के दर्शन कर परंपरा के अनुसार अर्घ्य दें।
- पूजा की रस्में पूरी करने के बाद अपने परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।
- लंबे समय तक उपवास के बाद पानी और हल्के भोजन से शुरुआत करें।
- शुरुआत में बहुत अधिक तला-भुना या भारी भोजन खाने से बचें।
Karwa Chauth Vrat Rules: कैसे रखें करवा चौथ का व्रत?
करवा चौथ का व्रत आमतौर पर सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के साथ शुरू होता है। परंपरा के अनुसार, सरगी सास की ओर से दी जाती है। इसमें फल, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
व्रत शुरू करने से पहले संतुलित भोजन करना और पर्याप्त पानी पीना उपयोगी हो सकता है। परंपरागत निर्जला व्रत में दिनभर पानी और अन्य पेय पदार्थ नहीं लिए जाते।
हालांकि, व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और नियमित दवाओं का ध्यान रखना जरूरी है। किसी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपवास करने का निर्णय लें।
Karwa Chauth Significance: पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना
करवा चौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला त्योहार है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस पर्व को करक चतुर्थी भी कहा जाता है।
इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, सूर्योदय से पहले सरगी खाने के बाद चंद्रोदय तक निर्जला उपवास किया जाता है।
दिन में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद पूजा की रस्में पूरी करके व्रत खोला जाता है।
कई परिवारों में छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस तरह करवा चौथ धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपरा और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से जुड़ा पर्व है।
करवा चौथ पर इन बातों का रखें ध्यान
करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को पूजा का मुहूर्त और अपने शहर के चंद्रोदय का समय पहले से पता कर लेना चाहिए। बादलों के कारण चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है, इसलिए केवल आसमान में चांद नजर आने के बजाय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करें।
व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। लंबे उपवास के बाद व्रत खोलते समय हल्का भोजन लेना बेहतर रहता है।
