Form-6 के अतिरिक्त घोषणापत्र पर विवाद
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 के साथ SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़े जाने पर विवाद सामने आया। इस बदलाव की वैधता को लेकर सवाल उठे और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने Form-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी और इस संबंध में चुनाव आयोग से रिकॉर्ड मांगे थे। 12 अक्टूबर को अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नए Form-6 की वैधता पर उसने न तो मंजूरी दी है और न ही उसे खारिज किया है। इस मामले में आगे सुनवाई होनी है।
चुनाव आयोग का कहना है कि Form-6 में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत उसके साथ अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ऑनलाइन Form-6 से अतिरिक्त घोषणापत्र हटाया गया है।
दिल्ली में 33 लाख मामलों में से 20 लाख का निपटारा
दिल्ली में मतदाता सूची से जुड़े सत्यापन के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। 13 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें से 20 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका था। शेष मामलों की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
मतदाता अपने रिकॉर्ड की जांच या आवश्यक सुधार के लिए संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर सकते हैं। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी मतदाता पंजीकरण और SIR से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं।
पश्चिम बंगाल में पात्र मतदाताओं को लेकर अभियान
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों के नाम जोड़ने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की जानकारी दी गई है। जिला निर्वाचन अधिकारियों और स्थानीय निर्वाचन तंत्र की भूमिका ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण है, ताकि पात्र मतदाताओं को पंजीकरण और दस्तावेजी प्रक्रिया में सहायता मिल सके।
हालांकि, सभी 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों को दिए गए निर्देशों और विशेष शिविरों की मौजूदा स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।
Form-7 और आपत्तियों की प्रक्रिया
मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए Form-7 का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में गलत या अनुचित आपत्तियों की आशंका के साथ-साथ पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा भी महत्वपूर्ण है।
Form-7 पर किसी नई सीमा या नियम में बदलाव के दावे को प्रकाशित करने से पहले चुनाव आयोग का संबंधित आदेश देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी से ऐसी सीमा के सटीक प्रावधान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है।
SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है। लेकिन इस प्रक्रिया में दस्तावेजों की मांग, नाम जोड़ने और हटाने के नियमों तथा प्रशासनिक फैसलों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्षी दलों ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को व्यवस्थित और अद्यतन करने की अपनी जिम्मेदारी पर जोर देता रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सत्यापन के दौरान किसी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित न हो और सूची में गलत प्रविष्टियों को सुधारने की प्रक्रिया भी पारदर्शी रहे।
फिलहाल Form-6 से जुड़ा मामला न्यायिक विचाराधीन है। इसलिए चुनाव आयोग के सभी कथित बदलावों को एक साथ अंतिम निर्णय या पांच फैसलों से पीछे हटने के रूप में प्रस्तुत करने से पहले प्रत्येक आदेश और उसकी आधिकारिक स्थिति की अलग-अलग पुष्टि आवश्यक है।
