जलस्तर बढ़ने से बिजली आपूर्ति बाधित होने का था खतरा
रमौआ डैम के बैकवाटर क्षेत्र के नजदीक से गुजर रही पुरानी ट्रांसमिशन लाइन मानसून के दौरान बढ़ते जलस्तर के कारण जोखिम में आ सकती थी। पानी का स्तर बढ़ने पर लाइन के कंडक्टर के पानी के संपर्क में आने की आशंका थी, जिससे विद्युत आपूर्ति में व्यवधान पैदा हो सकता था।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार, इसी संभावित खतरे को देखते हुए लाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। समय रहते काम पूरा होने से ग्वालियर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
8 पुराने टावर हटाकर लगाए गए 10 नए टावर
एमपी ट्रांसको के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस के मुख्य अभियंता दीपक कुमार अग्रवाल ने बताया कि शिफ्टिंग के दौरान पुरानी लाइन के आठ टावर हटाए गए। इनसे संबंधित लाइन की लंबाई 2.860 किलोमीटर थी।
इसके स्थान पर 10 नए टावर स्थापित किए गए और 3.406 किलोमीटर लंबी नई लाइन तैयार की गई। इस बदलाव के जरिए ट्रांसमिशन लाइन का मार्ग डैम के बैकवाटर क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से उत्पन्न होने वाली संभावित समस्या से सुरक्षित किया गया।
ग्वालियर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर
ट्रांसमिशन लाइन की शिफ्टिंग को मानसून के दौरान बिजली आपूर्ति से जुड़े जोखिम कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। डैम के आसपास जलस्तर बढ़ने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लाइन का मार्ग बदलने से संभावित व्यवधान की आशंका कम होगी।
एमपी ट्रांसको के इस कार्य से महलगांव-ग्वालियर और दतिया के बीच 220 केवी ट्रांसमिशन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
