भारत के पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर का जानिए इसका गौरवशाली इतिहास

भारत के पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर का जानिए इसका गौरवशाली इतिहास

 

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु देशभर के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजा का विशेष महत्व मानते हैं। इन्हीं 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान गुजरात के प्रभास पाटन स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का है। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास का भी प्रतीक माना जाता है।

शिव पुराण में मिलता है 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख

शिव पुराण की रुद्रसंहिता में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन मिलता है। इनमें सबसे पहले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का नाम आता है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं ज्योति स्वरूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इसे प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

कहां स्थित है सोमनाथ मंदिर?

सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रभास पाटन (वेरावल के पास) अरब सागर के किनारे स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही स्थान है, जहां भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए थे। मंदिर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा माना जाता है और इसका वर्तमान स्वरूप वर्ष 1951 में पुनर्निर्मित किया गया था।

चंद्रदेव से लेकर श्रीकृष्ण तक जुड़ी है मंदिर की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले चंद्रदेव (सोमराज) ने भगवान शिव की आराधना के लिए सोने का भव्य मंदिर बनवाया था। इसके बाद रावण ने चांदी का मंदिर बनवाया। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने लकड़ी से मंदिर का निर्माण कराया और बाद में भीमदेव ने पत्थरों से इसका पुनर्निर्माण करवाया। मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

कई बार हुआ आक्रमण, फिर भी कायम रही आस्था

इतिहास के अनुसार सोमनाथ मंदिर कई विदेशी आक्रमणों का शिकार हुआ। वर्ष 1025 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर इसकी अपार संपत्ति लूट ली और मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद भी अलग-अलग समय में मंदिर पर कई आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। यही कारण है कि सोमनाथ मंदिर भारतीय संस्कृति, आस्था और पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है।

कब जाएं सोमनाथ मंदिर?

सोमनाथ मंदिर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। हालांकि अक्टूबर से फरवरी के बीच का समय दर्शन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। वहीं महाशिवरात्रि, श्रावण मास और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *