कांगो के जंगलों में मिला रहस्यमयी लेसुला बंदर, इंसानों जैसी आंखों ने खींचा दुनिया का ध्यान

कांगो के जंगलों में मिला रहस्यमयी लेसुला बंदर, इंसानों जैसी आंखों ने खींचा दुनिया का ध्यान

कांगो के घने वर्षावनों में पाया जाने वाला लेसुला बंदर (Lesula Monkey) इन दिनों अपनी अनोखी शारीरिक बनावट के कारण चर्चा में है। इंटरनेट पर इस बंदर को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के मुताबिक इसकी पहचान Cercopithecus lomamiensis के रूप में की गई है।लेसुला को पहली बार वर्ष 2007 में वैज्ञानिकों ने एक स्थानीय स्कूल शिक्षक के घर पर बंधे हुए देखा था। इसके बाद लंबे अध्ययन और शोध के बाद वर्ष 2012 में इसे आधिकारिक तौर पर एक नई बंदर प्रजाति के रूप में घोषित किया गया।

क्या है लेसुला बंदर की पहचान?

लेसुला बंदर मध्य अफ्रीका के कांगो क्षेत्र में पाया जाता है। इसका प्राकृतिक आवास बेहद घने और कम आबादी वाले वर्षावनों में है। इसी वजह से वैज्ञानिकों को इस प्रजाति का पता लगाने में काफी समय लगा।इंटरनेट पर इसे कई बार ‘लिक्वेली’ नाम से भी बताया गया है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसकी पहचान लेसुला (Lesula) के नाम से की जाती है।

इंसानों जैसी क्यों दिखती हैं इसकी आंखें?

लेसुला बंदर की सबसे खास विशेषताओं में इसकी आंखें शामिल हैं। इसकी आंखें गहरी और शांत दिखाई देती हैं, जिसके कारण कई तस्वीरों में इसका चेहरा इंसानों जैसा नजर आता है।इसके चेहरे के आसपास हल्के पीले, गुलाबी और क्रीम रंग के बाल दिखाई देते हैं। होंठ और नाक के आसपास का चमकीला रंग किसी कृत्रिम रंग का परिणाम नहीं बल्कि इसकी त्वचा का प्राकृतिक रंग है।इसका शरीर मुख्य रूप से भूरे और कत्थई रंग का होता है।

पेड़ों के साथ जमीन पर भी रहता है यह बंदर

लेसुला के बारे में इंटरनेट पर यह दावा भी किया जाता है कि यह केवल ऊंचे पेड़ों पर रहता है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह जमीन पर भी काफी समय बिताता है।भोजन की तलाश में यह जंगल की जमीन पर घूम सकता है, जबकि पेड़ों का इस्तेमाल आराम करने, सोने या छिपने के लिए करता है। यह स्वभाव से शर्मीला माना जाता है और इंसानी बस्तियों से दूर रहना पसंद करता है।

कहां पाया जाता है लेसुला?

लेसुला का प्राकृतिक आवास कांगो के घने सदाबहार वर्षावनों में है। इसका क्षेत्र लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला बताया गया है।इसका प्रमुख संरक्षण क्षेत्र लोमामी नेशनल पार्क है। यह इलाका जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां कई दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं।

अवैध शिकार से बना हुआ है खतरा

लेसुला बंदर के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में स्थानीय स्तर पर होने वाला बुशमीट हंटिंग यानी मांस के लिए अवैध शिकार शामिल है।दुर्लभ प्रजाति होने के कारण इसके संरक्षण को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। लोमामी नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्रों का उद्देश्य ऐसे वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना भी है।

2012 में दुनिया के सामने आई नई प्रजाति

लेसुला की वैज्ञानिक पहचान वर्ष 2012 में नई प्रजाति के तौर पर सामने आई थी। इसकी खोज ने अफ्रीकी वर्षावनों में छिपी जैव विविधता की ओर वैज्ञानिकों और दुनिया का ध्यान खींचा।आज भी लेसुला अपनी अनोखी आंखों, चेहरे की बनावट और प्राकृतिक आवास के कारण वन्यजीव प्रेमियों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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