अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA चंद्रमा पर इंसानों की वापसी की तैयारी में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। एजेंसी के Artemis III मिशन के तहत 2027 में चार अंतरिक्ष यात्रियों को Orion अंतरिक्ष यान से पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजने की योजना है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद पर उतरने से पहले उन तकनीकों और प्रक्रियाओं का परीक्षण करना है, जिनकी भविष्य के चंद्र अभियानों में जरूरत होगी।
करीब 14 दिनों तक चलने वाले इस मिशन में NASA, Blue Origin और SpaceX के साथ मिलकर काम करेगी। अंतरिक्ष यात्री Blue Origin के Blue Moon लूनर लैंडर और SpaceX के Starship के परीक्षण संस्करणों के साथ डॉकिंग, संचार, नियंत्रण और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे। यह मिशन सीधे चंद्रमा पर उतरने के बजाय भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों के जोखिम को कम करने और तकनीकी तैयारियों को परखने पर केंद्रित होगा।
2027 में लॉन्च होगा Artemis III मिशन
NASA की योजना के अनुसार, Artemis III के तहत चार अंतरिक्ष यात्री Orion अंतरिक्ष यान में सवार होकर पृथ्वी की निचली कक्षा में जाएंगे। इनमें NASA के रैंडी ब्रेसनिक, फ्रैंक रुबियो, आंद्रे डगलस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री लुका पार्मितानो शामिल हैं।
इस मिशन में तीन अलग-अलग अंतरिक्ष यान को तीन अलग-अलग भारी प्रक्षेपण रॉकेटों से लॉन्च करने की योजना बनाई गई है। इसके बाद अंतरिक्ष में इन यानों के बीच तालमेल, नजदीकी उड़ान संचालन और डॉकिंग जैसी प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा।
NASA के Artemis कार्यक्रम प्रबंधक जेरेमी पार्सन्स के अनुसार, पृथ्वी की कक्षा में होने वाली प्रत्येक गतिविधि का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने से पहले जोखिम कम करना है। इस दौरान मिलने वाले अनुभव भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी में मदद करेंगे।
सबसे पहले Blue Origin के Blue Moon लैंडर का परीक्षण
मिशन के शुरुआती चरण में Blue Origin अपने Blue Moon Mark 2 लूनर लैंडर का परीक्षण संस्करण पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजेगी। इसे पृथ्वी से लगभग 273 मील की ऊंचाई पर स्थापित करने की योजना है। यह परीक्षण यान कक्षा में 30 दिनों तक रह सकता है, जिससे मिशन की समय-सारणी को जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
इसके कुछ दिनों बाद NASA अपने Space Launch System (SLS) रॉकेट से Orion अंतरिक्ष यान को लॉन्च करेगी। शुरुआत में Orion एक अंडाकार कक्षा में जाएगा। इसके बाद आवश्यक कक्षीय बदलावों के जरिए उसे लगभग 345 मील की ऊंचाई वाली गोलाकार कक्षा में लाया जाएगा।
उड़ान के शुरुआती दो दिनों में अंतरिक्ष यात्री Orion के सिस्टम की जांच करेंगे और Blue Moon लैंडर के साथ मिलने की तैयारी करेंगे। इसके बाद दोनों अंतरिक्ष यानों के बीच रेंडेवू और डॉकिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
Blue Moon लैंडर के अंदर जाकर सिस्टम जांचेंगे अंतरिक्ष यात्री
Orion के Blue Moon परीक्षण यान से जुड़ने के बाद अंतरिक्ष यात्री लगभग दो दिन लैंडर के अंदर रहकर उसकी व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करेंगे। वे यान का हैच खोलकर अंदर प्रवेश करेंगे और केबिन के वातावरण, नियंत्रण प्रणाली तथा जीवन-समर्थन व्यवस्था की जांच करेंगे।
इस परीक्षण में यह भी देखा जाएगा कि लैंडर के भीतर हवा का दबाव और वातावरण उचित स्तर पर बनाए रखने वाले सिस्टम किस तरह काम करते हैं। इसके अलावा एवियोनिक्स, सॉफ्टवेयर, फ्लाइट कंट्रोल और चालक दल के केबिन से जुड़ी तकनीकों का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
यह परीक्षण NASA के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहली बार अंतरिक्ष में चालक दल की मौजूदगी के साथ किसी व्यावसायिक चंद्र लैंडर की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष आकलन करने का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी जुटाई जा सकेगी।
इसके बाद SpaceX Starship के साथ होगी डॉकिंग
Blue Origin के लैंडर के साथ परीक्षण पूरा करने के बाद Orion उससे अलग होगा और मिशन के अगले चरण की तैयारी करेगा। इस चरण में SpaceX अपने Starship Version 3 के परीक्षण संस्करण को लॉन्च करेगी।
योजना के अनुसार, Starship को लगभग 206 नॉटिकल मील की ऊंचाई वाली कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके अगले हिस्से में डॉकिंग के लिए विशेष सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे Orion अंतरिक्ष यान उससे जुड़ सकेगा।
NASA के मुताबिक, Starship के साथ डॉकिंग परीक्षण लगभग दो घंटे तक चल सकता है। इस चरण में अंतरिक्ष यात्री Starship के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे। परीक्षण का उद्देश्य दोनों अंतरिक्ष यानों के बीच डॉकिंग और अनडॉकिंग की प्रक्रिया, संचार व्यवस्था, सॉफ्टवेयर के तालमेल और यान के नियंत्रण की क्षमता को परखना होगा।
Blue Moon और Starship के डॉकिंग सिस्टम अलग-अलग डिजाइन के हैं। एक ही मिशन में दोनों के साथ परीक्षण करने से NASA को भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए अलग-अलग तकनीकी व्यवस्थाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
Orion अंतरिक्ष यान पर भी होंगे कई अहम परीक्षण
Blue Origin और SpaceX के साथ डॉकिंग परीक्षण पूरे होने के बाद भी मिशन का काम समाप्त नहीं होगा। NASA के अनुसार, इसके बाद Orion और चालक दल के पास पृथ्वी की कक्षा में पांच दिन तक अतिरिक्त समय हो सकता है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के सुरक्षा सूट, डॉकिंग सेंसर, तापमान और ध्वनि से जुड़े माप तथा मानव कारकों से संबंधित कई परीक्षण किए जाएंगे।
मिशन में कुछ वैज्ञानिक प्रयोग भी शामिल होंगे। इनमें कोशिकीय जीव विज्ञान से जुड़ा प्रयोग और पौधों के बीजों को अंतरिक्ष में ले जाने की योजना शामिल है। इन गतिविधियों से वैज्ञानिक अध्ययन और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए उपयोगी जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, NASA यह भी अध्ययन करेगी कि भविष्य में चंद्रमा से लाए जाने वाले नमूनों को पृथ्वी पर कैसे पहुंचाया जाए, उन्हें किस तरह सुरक्षित रखा जाए और वैज्ञानिक जांच के लिए तैयार किया जाए। अंतरिक्ष यान के वातावरण का मूल्यांकन भी किया जाएगा, ताकि भविष्य के चंद्र अभियानों में संभावित दूषण से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी और सूर्य का अवलोकन भी करेंगे। इससे उन्हें अंतरिक्ष से महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटनाओं को देखने और उनका अध्ययन करने का अनुभव मिलेगा।
प्रशांत महासागर में होगा Orion का स्प्लैशडाउन
मिशन के सभी प्रमुख परीक्षण पूरे होने के बाद Orion अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर लौटने की तैयारी करेगा। योजना के अनुसार, इसकी वापसी और स्प्लैशडाउन कैलिफोर्निया के तट के पास प्रशांत महासागर में होगा। इसके बाद NASA और अमेरिकी नौसेना की टीमें अंतरिक्ष यात्रियों तथा यान को सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया पूरी करेंगी।
चंद्रमा पर इंसानों की वापसी की तैयारी में अहम कदम
Artemis III मिशन का सबसे बड़ा उद्देश्य भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों से पहले तकनीकी और संचालन संबंधी जोखिमों को कम करना है। इसके जरिए NASA यह समझ सकेगी कि Orion अंतरिक्ष यान अलग-अलग व्यावसायिक लैंडरों के साथ अंतरिक्ष में किस तरह काम करता है।
इस मिशन से अंतरिक्ष यानों के बीच तालमेल, संचार, डॉकिंग, चालक दल के संचालन और मिशन कंट्रोल की तैयारियों को परखने का अवसर मिलेगा। इन परीक्षणों से मिलने वाली जानकारी भविष्य में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास इंसानों को उतारने की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।
NASA की योजना के मुताबिक, 2028 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने की दिशा में तैयारी की जा रही है। हालांकि, यह लक्ष्य मिशन की प्रगति और तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगा। Artemis III के दौरान जुटाया गया अनुभव भविष्य के चंद्र अभियानों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
