NASA के अनुसार, लूसी पहला अंतरिक्ष यान है जिसे विशेष रूप से बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रहों की खोज के लिए भेजा गया है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन प्राचीन खगोलीय पिंडों के अध्ययन से करीब 4.5 अरब वर्ष पहले ग्रहों के निर्माण और उनकी वर्तमान स्थिति तक पहुंचने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।
बृहस्पति की कक्षा में मौजूद हैं क्षुद्रग्रहों के दो बड़े समूह
बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रह सूर्य के चारों ओर ग्रह की कक्षा में मौजूद दो बड़े समूहों में बंटे हुए हैं। ये समूह लैग्रेंज बिंदु L4 और L5 के आसपास स्थित हैं। इनमें से एक समूह बृहस्पति से आगे चलता है, जबकि दूसरा उसकी कक्षा में पीछे रहता है।
इन क्षेत्रों को अंतरिक्ष में स्थिरता वाले ऐसे स्थानों के रूप में जाना जाता है, जहां सूर्य और बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के संयुक्त प्रभाव से हजारों क्षुद्रग्रह अपनी कक्षाओं में बने रह सकते हैं।
NASA के मुताबिक, ये क्षुद्रग्रह बृहस्पति से लगभग उतनी ही दूरी पर हैं, जितनी दूरी पर बृहस्पति सूर्य से स्थित है। यह दूरी करीब 48.4 करोड़ मील है।
रेडियो सिग्नल और तारों की तस्वीरों से ट्रैक हो रहा Lucy
अंतरिक्ष में इन क्षेत्रों की कोई स्पष्ट सीमा नहीं है। ऐसे में मिशन इंजीनियर लूसी की स्थिति का पता अंतरिक्ष यान से मिलने वाले रेडियो सिग्नल और आसपास के तारों की तस्वीरों के आधार पर लगा रहे हैं।
ट्रोजन क्षुद्रग्रह एक-दूसरे से औसतन 60 लाख मील से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। इसी वजह से लूसी को शुरुआती चरण में ये पिंड तारों के बीच प्रकाश के छोटे बिंदुओं की तरह दिखाई देंगे। अंतरिक्ष यान जब अपने निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंचेगा, तब वह उनका अधिक विस्तृत अध्ययन कर सकेगा।
इससे पहले कई अंतरिक्ष यान बृहस्पति के पास से गुजर चुके हैं। कुछ ने ग्रह के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल अपनी आगे की यात्रा के लिए भी किया। इस तकनीक को ग्रैविटी असिस्ट कहा जाता है। हालांकि, बृहस्पति के ट्रोजन क्षुद्रग्रहों तक पहुंचने और उनका अध्ययन करने के उद्देश्य से बनाया गया NASA का Lucy मिशन इस लिहाज से विशेष है।
अगस्त 2027 में Eurybates के पास से गुजरेगा अंतरिक्ष यान
NASA के मिशन कार्यक्रम के अनुसार, लूसी की पहली ट्रोजन क्षुद्रग्रह के साथ नजदीकी मुलाकात 11 अगस्त 2027 को Eurybates के पास से गुजरने के दौरान होगी। इसके बाद अंतरिक्ष यान अगले कुछ वर्षों में अन्य क्षुद्रग्रहों का अध्ययन करेगा।
मिशन के प्रमुख निर्धारित पड़ाव इस प्रकार हैं:
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11 अगस्त 2027: Eurybates के पास से गुजरेगा।
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सितंबर 2027: Polymele का अध्ययन करेगा।
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अप्रैल 2028: Leucus के पास से गुजरेगा।
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नवंबर 2028: Orus का अध्ययन करेगा।
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2030: पृथ्वी के पास लौटकर तीसरी और अंतिम ग्रैविटी असिस्ट प्रक्रिया से गुजरेगा।
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मार्च 2033: बृहस्पति के पीछे चलने वाले ट्रोजन समूह में Patroclus और Menoetius नामक दोहरे क्षुद्रग्रह तंत्र का अध्ययन करेगा।
इन पड़ावों के जरिए वैज्ञानिकों को ट्रोजन क्षुद्रग्रहों के अलग-अलग प्रकार और उनकी संरचना को समझने का अवसर मिलेगा।
सूर्य से पांच गुना अधिक दूरी पर भी काम कर रहा है Lucy
जैसे-जैसे लूसी सूर्य से दूर जा रहा है, उसे कम रोशनी और गिरते तापमान वाले वातावरण में काम करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में सूर्य की दूरी पृथ्वी की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।
NASA के मुताबिक, अंतरिक्ष यान का डिजाइन ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और फिलहाल अंतरिक्ष यान तथा उसके वैज्ञानिक उपकरण उम्मीद के मुताबिक काम कर रहे हैं।
वैज्ञानिक अब Eurybates के पास होने वाली पहली मुलाकात की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। इसमें अंतरिक्ष यान, उपकरणों और मिशन टीम को इस तरह तैयार करना शामिल है कि क्षुद्रग्रह के नजदीक बिताए जाने वाले कुछ घंटों का अधिकतम वैज्ञानिक लाभ मिल सके।
