क्या है Swift टेलीस्कोप और क्यों है खास
Swift का पूरा नाम Neil Gehrels Swift Observatory है। इसे वर्ष 2004 में लॉन्च किया गया था। वर्ष 2018 में इसका नाम इसके दिवंगत प्रमुख वैज्ञानिक नील गेरेल्स के सम्मान में रखा गया।
इस टेलीस्कोप का मुख्य काम गामा-रे बर्स्ट यानी ब्रह्मांड में होने वाले बेहद शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन करना था। इसकी खासियत यह थी कि यह ऐसी घटनाओं का पता लगाकर दुनिया भर की वेधशालाओं को तेजी से अलर्ट कर सकता था। इससे वैज्ञानिक समय रहते दूरबीनों को उस दिशा में मोड़कर विस्फोटों का अध्ययन कर पाते थे।
Swift को मूल रूप से दो साल के प्राथमिक मिशन के लिए तैयार किया गया था, लेकिन इसने अपनी निर्धारित अवधि से दस गुना से भी अधिक समय तक काम किया।
बचाने की कोशिश भी नहीं हो सकी सफल
पृथ्वी के वायुमंडल से बढ़ते प्रतिरोध के कारण Swift की कक्षा लगातार नीचे आ रही थी। टेलीस्कोप को सुरक्षित ऊंचाई वाली कक्षा में पहुंचाने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी Katalyst ने कम समय में एक विशेष अंतरिक्ष यान तैयार कर लॉन्च किया था।
इस मिशन का उद्देश्य Swift को धक्का देकर ऊंची कक्षा में पहुंचाना था, ताकि उसका वैज्ञानिक काम जारी रह सके। हालांकि, बचाव की यह कोशिश सफल नहीं हो सकी और टेलीस्कोप को दोबारा ऊंची कक्षा में पहुंचाने का प्रयास नहीं किया जा सका। अब इसके पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश को रोकने का कोई प्रभावी विकल्प नहीं बचा है।
2,000 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट का किया अध्ययन
अपने लंबे वैज्ञानिक जीवन के दौरान Swift ने 2,000 से अधिक गामा-रे बर्स्ट और 1,400 से ज्यादा सुपरनोवा का अध्ययन किया। इसकी तेज प्रतिक्रिया क्षमता इसे दूसरे अंतरिक्ष उपकरणों से अलग बनाती थी।
किसी खगोलीय विस्फोट की दिशा में मुड़कर उसका अध्ययन करने में इसे आम तौर पर लगभग एक मिनट लगता था। इसी वजह से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की कुछ सबसे ऊर्जावान घटनाओं को जल्दी समझने में मदद मिली।
वैज्ञानिक शोध में अहम योगदान
NASA के मुताबिक, Swift के उपकरणों से मिले डेटा के आधार पर करीब 7,000 वैज्ञानिक शोध प्रकाशित हुए। इसके पूरे डेटा संग्रह का आकार लगभग 12 टेराबाइट है।
Swift का मिशन समाप्त होने के बावजूद वैज्ञानिक इसके संग्रहित डेटा का विश्लेषण जारी रख सकते हैं। NASA ने इसके वैज्ञानिक योगदान को याद करते हुए बताया है कि इस टेलीस्कोप ने गामा-रे विस्फोटों और अन्य खगोलीय घटनाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश का इंतजार
Swift की कक्षा काफी नीचे आ जाने और वायुमंडलीय प्रतिरोध बढ़ने के कारण इसके जल्द पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने की आशंका है। इस दौरान वायुमंडल के साथ घर्षण से अंतरिक्ष यान का अधिकांश हिस्सा जल सकता है।
इस तरह दो दशक से अधिक समय तक ब्रह्मांड के शक्तिशाली विस्फोटों पर नजर रखने वाले NASA के इस मिशन का वैज्ञानिक संचालन समाप्त हो गया है। हालांकि, इससे जुटाया गया डेटा भविष्य में भी अंतरिक्ष विज्ञान के शोध में उपयोगी बना रहेगा।
