NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने चांद की सतह पर एक नया और बेहद बड़ा क्रेटर खोजा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अब तक पहचाना गया सबसे बड़ा नया बना चंद्र क्रेटर है। इसे McGetchin Crater नाम दिया गया है।
यह क्रेटर 11 अप्रैल से 22 मई 2024 के बीच किसी समय एक बड़े अंतरिक्षीय पिंड के चांद की सतह से टकराने के बाद बना। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस आकार की टक्कर चांद पर लगभग एक सदी या उससे भी लंबे अंतराल में एक बार हो सकती है।

728 फीट चौड़ा और 141 फीट गहरा है क्रेटर
McGetchin Crater का व्यास करीब 728 फीट (लगभग 222 मीटर) है, जबकि इसकी गहराई करीब 141 फीट (43 मीटर) है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जिस पिंड के टकराने से यह क्रेटर बना, उसका आकार करीब तीन से छह मंजिला इमारत जितना हो सकता है।
इस क्रेटर का नाम चंद्र वैज्ञानिक Tom McGetchin के सम्मान में रखा गया है।
एक चमकीले निशान से शुरू हुई खोज
इस खोज की शुरुआत LRO के डेटा की सामान्य जांच के दौरान हुई। LRO से जुड़े image-processing specialist Robert Wagner चांद के एक बड़े मानचित्र को देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक असामान्य चमकीला निशान दिखाई दिया, जिसके चारों तरफ गहरा क्षेत्र था।
Wagner ने पुराने और नए चंद्र चित्रों की तुलना की। इसके बाद उन्हें पता चला कि यह चमकीला पैटर्न किसी नए प्रभाव से बाहर निकली सतह की सामग्री यानी impact debris का संकेत हो सकता है।

LRO की तस्वीरों से हुआ खुलासा
LRO पिछले 17 वर्षों से अधिक समय से चांद की परिक्रमा कर रहा है। इसके सात उपकरण चंद्र सतह की बनावट, संरचना, तापमान और विकिरण वातावरण का अध्ययन करते हैं।
वैज्ञानिकों ने मिशन के दौरान कम से कम 1,000 नए impact craters की पहचान की है और करीब 1 लाख अन्य सतही बदलावों को भी दर्ज किया है, जो अंतरिक्षीय पिंडों के टकराने या उनसे निकले मलबे के कारण हुए।
McGetchin की पहचान Wide-Angle Camera से मिले व्यापक क्षेत्र के चित्रों की तुलना से हुई। इसके बाद LRO के Narrow-Angle Camera से इस स्थान की ज्यादा स्पष्ट तस्वीरें ली गईं, जिनसे क्रेटर के आकार और आसपास की सतह पर पड़े प्रभाव का अध्ययन किया गया।
क्रेटर के आसपास 4 मील तक दिखा असर
इस खोज के बाद LRO के Diviner नामक thermal instrument से भी क्षेत्र का अध्ययन किया गया। वैज्ञानिकों ने क्रेटर के आसपास करीब 4 मील (लगभग 6.4 किलोमीटर) चौड़ा ऐसा क्षेत्र पाया, जो रात के समय आसपास की सतह की तुलना में करीब 16 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 9 डिग्री सेल्सियस) ठंडा था।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, टक्कर से क्रेटर के आसपास की चंद्र मिट्टी यानी regolith ढीली और कम घनी हो गई। इसकी वजह से वह आसपास की सतह की तरह गर्मी को प्रभावी ढंग से रोक नहीं पाती।
चांद की सतह पर छोटी-बड़ी टक्करें जारी
चांद पर पृथ्वी जैसा वातावरण नहीं है, इसलिए अंतरिक्ष से आने वाले छोटे-बड़े पिंड आसानी से उसकी सतह तक पहुंच जाते हैं। LRO की तस्वीरों में वैज्ञानिक लगभग 30 फीट चौड़े छोटे क्रेटर भी पहचान सकते हैं।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस आकार के करीब 140 नए क्रेटर हर साल चांद पर बन सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर टक्करें बेहद छोटे पिंडों से होती हैं, जिनके निशान ऑर्बिटल तस्वीरों में आसानी से दिखाई नहीं देते।
McGetchin की खोज यह भी दिखाती है कि किसी बड़े impact का असर केवल क्रेटर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास की सतह को भी काफी दूर तक बदल सकता है। इसका भविष्य में चंद्र रोवरों की आवाजाही और सतह पर उनके पहियों के व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है।
