केंद्र सरकार ने कोरोना वैक्सीनेशन के लिए राज्यों को गाइडलाइन भेजी है। इसके मुताबिक, हर दिन एक सेशन में 100 से 200 लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। वैक्सीनेशन के बाद 30 मिनट तक मॉनीटरिंग की जाएगी ताकि किसी विपरीत प्रभाव का पता लगाया जा सके। गाइडलाइन के मुताबिक, प्राथमिकता के आधार पर केवल उन लोगों को ही वैक्सीन दी जाएगी, जिन्होंने पहले से रजिस्ट्रेशन करवा रखा है।
वैक्सीनेशन के लिए गाइडलाइन
- गाइडलाइन के मुताबिक, कोविड वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क सिस्टम कोविन के जरिए रजिस्टर्ड लोगों को ट्रैक किया जाएगा और इसके साथ ही एंटी-कोरोनावायरस वैक्सीन की रियल टाइम इन्फर्मेशन हासिल की जाएगी।
- पहले से रजिस्टर्ड व्यक्ति का ही वैक्सीनेशन होगा। ऑन द स्पॉट वैक्सीनेशन का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
- राज्यों को एक जिले में एक ही वैक्सीन मैन्युफैक्चरर की वैक्सीन अलॉट करने को कहा गया है ताकि फील्ड में अलग-अलग तरह की कोविड वैक्सीन मिक्स न हो सकें।
- वैक्सीन ले जाने वाले वाहन, वैक्सीन की शीशी और आइस पैक को सीधे सूर्य की रोशनी से बचाने के लिए प्रबंध किए जाएंगे।
- वैक्सीन वॉइल मॉनीटर्स नहीं हो सकते हैं और शीशी पर डेट ऑफ एक्सपायरी भी नहीं लिखी हो सकती है। लेकिन, इससे वैक्सीनेशन पर प्रभावित नहीं होना चाहिए।
- वैक्सीनेशन का सेशन खत्म होने के बाद सभी अनओपन वैक्सीन की शीशियों को आइसपैक में रखकर डिस्ट्रिब्यूटिंग कोल्ड चेन प्वाइंट पर ले जाया जाएगा।
- शुरुआत में वैक्सीनेशन के हर सेशन में केवल 100 लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। वैक्सीन की उपलब्धता और इंतजाम बेहतर हुए तो यह संख्या 200 भी हो सकती है।
