सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। आयोग को भी इस अवधि में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का विकल्प दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन की नई याचिका को भी पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया गया है।
दिवाली के बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के कामकाज, मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। अदालत ने संबंधित पक्षों को जवाब और अन्य कानूनी दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय दिया है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग की ओर से दाखिल संयुक्त हलफनामे पर 10 दिनों के भीतर अपना जवाब देना है। आयोग चाहे तो इसी अवधि में अतिरिक्त हलफनामा भी दाखिल कर सकता है।
अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद होने की संभावना है। इस दौरान दोनों पक्षों को अपनी दलीलें और दस्तावेज तैयार करने का अवसर मिलेगा।
डोला सेन की याचिका भी लंबित मामलों से जुड़ी
सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन की ओर से दायर नई याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। इस याचिका को पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया गया है।
याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अंतिम निर्णय आने तक इस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
हालांकि, SIR पर रोक लगाने की मांग और इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर अंतिम निर्णय अदालत की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में किया प्रक्रिया का बचाव
दूसरी ओर, भारतीय चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त हलफनामा दाखिल कर याचिकाकर्ताओं के आरोपों को निराधार बताया है। आयोग का कहना है कि SIR और चुनाव प्रबंधन से जुड़े उसके फैसले कानून के अनुरूप हैं।
आयोग के अनुसार, संबंधित निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त सहित तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। इस तरह आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया है।
अब अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं के आरोपों और आयोग के जवाब पर विचार किया जाना है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर भी सवाल
इस मामले में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े वर्ष 2023 में लागू कानून को चुनौती देने का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने आयोग की स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है।
विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति के बजाय एकतरफा तरीके से लिए गए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रिया को विधिसम्मत बताया है।
अब अदालत के अगले कदम पर रहेगी नजर
SIR प्रक्रिया, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति कानून से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय मिला है और आयोग अतिरिक्त हलफनामा पेश कर सकता है।
दिवाली के बाद होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
