संसद का विशेष सत्र अक्टूबर के अंत में बुलाए जाने की चर्चाओं के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, सत्र की तारीखों और विधायी एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं होने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था, लेकिन दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। इसी आधार पर मौजूदा सत्र के तहत विशेष बैठक आयोजित करने की संभावना जताई जा रही है।
संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से संभावित तारीखों और विधायी कामकाज की रूपरेखा तैयार किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, बैठक बुलाने की प्रक्रिया और संवैधानिक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक संसदीय सूचना से करना जरूरी है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर हो सकती है चर्चा
संभावित विशेष सत्र में महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन प्रस्तावों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की बात सामने आई है। इन मुद्दों का संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व तथा निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना से है।
संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद में निर्धारित विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसलिए सरकार के लिए सांसदों का समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, विधेयकों की मौजूदा स्थिति और उन्हें दोबारा पेश किए जाने की योजना की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
डीएमके और अन्य दलों के समर्थन पर नजर
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में संख्या बल मजबूत करने के लिए डीएमके समेत कुछ क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है।
संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर मतदान के दौरान पर्याप्त समर्थन जुटाना सरकार के लिए अहम होगा। हालांकि, संबंधित दलों के रुख और समर्थन को लेकर आधिकारिक बयान सामने आने पर ही राजनीतिक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम का भी ध्यान
26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेष सत्र की संभावित तारीखें तय करते समय इस कार्यक्रम को ध्यान में रखा जा सकता है।
वहीं, विपक्ष की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की बात कही गई है। ऐसे में संसद की संभावित बैठक के दौरान राजनीतिक टकराव की आशंका भी बनी रह सकती है।
