राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उनके भाषण को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में सेवा, राष्ट्र निर्माण और संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से संघ की पंच परिवर्तन अवधारणा को अहम बताते हुए कहा कि इसके जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिल सकती है।
पंच परिवर्तन को पीएम मोदी ने बताया महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत के संबोधन में उठाए गए पंच परिवर्तन के विषय की सराहना की। संघ की इस अवधारणा में सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया जाता है।
- सामाजिक समरसता: समाज से भेदभाव दूर कर आपसी सद्भाव और एकता को बढ़ावा देना।
- कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संस्कार, संवाद और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना।
- स्वदेशी और स्व बोध: भारतीय पहचान, संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- नागरिक अनुशासन: नागरिक कर्तव्यों का पालन करना और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना।
पीएम मोदी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने संगठन को आगे बढ़ाने वाले स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्र प्रथम की भावना और कर्तव्यनिष्ठा के साथ समाज सेवा करने वालों का उल्लेख किया।
मोहन भागवत बोले- स्वतंत्रता के बाद भी समर्पण जरूरी
नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए जिस तपस्या और समर्पण की जरूरत थी, मौजूदा परिस्थितियों में उससे भी अधिक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि समाज को अपनी विस्मृति दूर कर देश की वास्तविक पहचान और उसके मूल तत्वों को समझना चाहिए। इसके अनुरूप जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने की आवश्यकता है।
भागवत ने पंच परिवर्तन को केवल एक साल तक चलने वाला कार्यक्रम मानने के बजाय जीवन के व्यवहार और आचरण में बदलाव लाने की पद्धति बताया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इन पांचों पहलों को अपनाने की अपील की।
नई पीढ़ी और OTT प्लेटफॉर्म को लेकर जताई चिंता
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने नई पीढ़ी तक पहुंचने वाली सूचनाओं और उनके विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा कई बार विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को सही-गलत पर विचार किए बिना स्वीकार कर लेते हैं। उनके मुताबिक, इसके संभावित दुष्परिणामों को देखते हुए कई देशों में इस क्षेत्र में अनुशासन और प्रतिबंधों से जुड़े कदम उठाए गए हैं।
भागवत ने भारत में भी खासकर OTT प्लेटफॉर्म को लेकर विचार करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने शासन और प्रशासन से इस विषय पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने और नई पीढ़ी में नैतिक संस्कार विकसित करने पर जोर दिया।
पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और नशे पर भी रखे विचार
RSS प्रमुख ने हिमालयी क्षेत्रों में विकास गतिविधियों के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव मजबूत करने और सोशल मीडिया से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील की।
मोहन भागवत ने नशीली दवाओं की लत को भी गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे। उनके अनुसार, नई पीढ़ी में सही विवेक और नैतिक संस्कार विकसित करना वर्तमान अभिभावक पीढ़ी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी RSS की स्थापना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। वर्ष 2025 में संगठन ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। इसी उपलक्ष्य में नागपुर के रेशिमबाग मैदान में शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव आयोजित किया गया।कार्यक्रम में मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की और संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की। उत्सव की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन के साथ हुई।
