शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था। इस दिन चंद्रमा की रोशनी को शीतलता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में इस अवसर पर व्रत रखा जाता है और भगवान को खीर का भोग अर्पित किया जाता है।
चांदनी में खीर रखने की परंपरा
शरद पूर्णिमा पर रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणकारी होती हैं। हालांकि, चांदनी में रखी खीर से विशेष स्वास्थ्य लाभ होने के दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
पूजा-पाठ और साधना का महत्व
इस दिन श्रद्धालु भगवान की पूजा-अर्चना, व्रत, जप और सत्संग करते हैं। धार्मिक परंपराओं में शरद पूर्णिमा की रात को आध्यात्मिक साधना और मन की शांति के लिए विशेष माना गया है। कुछ मान्यताओं में चंद्रमा की रोशनी में समय बिताने और खीर का प्रसाद ग्रहण करने का उल्लेख भी मिलता है।
पंचांग के अनुसार 24 अक्टूबर की तिथि
शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 के दिए गए पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी दोपहर 1:36 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी शुरू होगी। नक्षत्र उत्तराभाद्रपद रात 8:32 बजे तक रहेगा, इसके बाद रेवती नक्षत्र लगेगा। राहुकाल सुबह 9:30 बजे से 10:56 बजे तक बताया गया है।
