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पीएम मोदी ने हिमवीरों को दी बधाई, जानें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की खासियत

पीएम मोदी ने हिमवीरों को दी बधाई, जानें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की खासियत पीएम मोदी ने हिमवीरों को दी बधाई, जानें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की खासियत

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बल के जवानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने हिमवीरों की बहादुरी, निस्वार्थ सेवा और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भीषण ठंड के बीच सीमा की सुरक्षा में तैनात ITBP के जवान देश की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में ITBP के जवानों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी असाधारण बहादुरी से अलग पहचान बनाई है और हर चुनौती का डटकर सामना किया है।

24 अक्टूबर 1962 को हुआ था ITBP का गठन

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का गठन 24 अक्टूबर 1962 को किया गया था। यह बल भारत-चीन सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा में तैनात रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ITBP लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की निगरानी करता है। यह सीमा लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक फैली हुई है।

सीमा सुरक्षा के अलावा ITBP आंतरिक सुरक्षा से जुड़े अभियानों में भी भाग लेता है। छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों में इसकी तैनाती भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

9,000 से 18,800 फीट की ऊंचाई पर तैनात रहते हैं जवान

ITBP के जवानों की ड्यूटी सामान्य परिस्थितियों से काफी अलग होती है। बल की कई सीमा चौकियां समुद्र तल से 9,000 से 18,800 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित हैं। इन इलाकों में सर्दियों के दौरान तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

कम ऑक्सीजन, बर्फबारी, तेज हवाओं और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच जवानों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है। इन कठिन परिस्थितियों में भी वे सीमा की निगरानी और सुरक्षा से जुड़े अपने दायित्व निभाते हैं। इसी वजह से ITBP के जवानों को ‘हिमवीर’ के नाम से भी जाना जाता है।

पर्वतारोहण और सामरिक युद्ध का विशेष प्रशिक्षण

ITBP के जवानों को हिमालयी क्षेत्रों में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें पर्वतारोहण, स्कीइंग और सामरिक युद्ध जैसी गतिविधियां शामिल हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें ऊंचाई वाले इलाकों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम बनाता है।

बल की जिम्मेदारी केवल सीमा की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन, हिमस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों में भी ITBP के जवान योगदान देते हैं। जरूरत पड़ने पर वे प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और सहायता पहुंचाने के अभियानों में शामिल होते हैं।

सीमा सुरक्षा के साथ आपदा राहत में भी अहम भूमिका

दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तैनाती और विशेष प्रशिक्षण के कारण ITBP प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बर्फबारी और खराब मौसम के बीच फंसे लोगों की तलाश, बचाव अभियान और प्रभावित क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाना इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं।

ITBP के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश सीमा पर तैनात जवानों के योगदान को रेखांकित करता है। देश की सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आंतरिक सुरक्षा और आपदा राहत तक, यह बल विभिन्न परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाता है।

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