Headlines

4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की गिरावट,सेंसेक्स 1,600 अंक से ज्यादा टूटा

भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स की गिरावट और निवेशकों की संपत्ति में कमी को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य शेयर बाजार में भारी गिरावट, चार दिन में करीब ₹21 लाख करोड़ घटा मार्केट कैप
भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई की आशंका के बीच बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। 23 अक्टूबर को समाप्त हुए चार कारोबारी सत्रों में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 20.79 लाख करोड़ रुपये घट गया।

सेंसेक्स 1,600 अंक से ज्यादा फिसला

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। छुट्टियों के कारण छोटे रहे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स कुल 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत नीचे आ गया।

बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 16 अक्टूबर को 4,72,62,167.42 करोड़ रुपये था। चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद यह घटकर 4,51,83,393.14 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह बाजार मूल्य में 20,78,774.28 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

यह आंकड़ा कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में आई कमी को दर्शाता है। इसे निवेशकों के वास्तविक नकद नुकसान के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में गिरावट

शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स की कंपनियों में टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ट्रेंट, टेक महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडिगो, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी, एसबीआई और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं, इटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल शामिल है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आई और कारोबार के दौरान यह 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। सऊदी अरब के तेल ठिकानों को लेकर बढ़ी चिंताओं और यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी बाजार पर दबाव डाल रही है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई, कंपनियों की उत्पादन लागत और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

बाजार में गिरावट के पांच प्रमुख कारण

1. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है।

2. कच्चे तेल की महंगाई: तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता है।

3. महंगाई का खतरा: महंगा ईंधन परिवहन और उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

4. वैश्विक बाजारों की कमजोरी: अमेरिकी बाजारों में गिरावट और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया।

5. कमजोर रुपये और बॉन्ड यील्ड: रुपये में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे कारक भी निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *