रायपुर में कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की तलाश के बीच पुलिस विभाग ने दो आरक्षकों को लाइन अटैच किया है। कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब पुलिस की टीमों ने शोएब के कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गया। पुलिस कार्रवाई की गोपनीय जानकारी आरोपी तक पहुंचने की आशंका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस कार्रवाई की जानकारी लीक होने की आशंका
रिपोर्टों के अनुसार, शोएब की दोबारा गिरफ्तारी के लिए अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की थी। टीम ने शहर में करीब आधा दर्जन स्थानों पर दबिश दी, लेकिन आरोपी पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गया।
इसके बाद पुलिस विभाग ने यह पता लगाने की जांच शुरू की कि छापेमारी से जुड़ी गोपनीय जानकारी आरोपी तक कैसे पहुंची। इसी सिलसिले में आरक्षक शिवम द्विवेदी को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह भी पढ़े: 2 अक्टूबर 2026: षष्ठी के बाद सप्तमी, जानें राहुकाल और श्राद्ध के नियम
दो आरक्षकों पर कार्रवाई
रिपोर्टों में दो आरक्षकों को लाइन अटैच किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस आदेशों में कार्रवाई के कारण को प्रशासनिक कारण या लापरवाही के रूप में बताया गया है और गोपनीय सूचना लीक करने की भूमिका को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी लीक होने की आशंका की जांच के बीच आरक्षकों पर विभागीय कार्रवाई हुई है।
आधा दर्जन ठिकानों पर दबिश
शोएब की तलाश में पुलिस ने उसके पाम बेलाजिओ स्थित ठिकाने, बैरन बाजार स्थित पारिवारिक आवास समेत कई संभावित स्थानों पर दबिश दी। इसके बावजूद पुलिस को सफलता नहीं मिली।
पुलिस को आशंका है कि शोएब राज्य से बाहर जा सकता है। इसी वजह से उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों पर भी नजर रखी जा रही है।
यह भी पढ़े:यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए PM मोदी के प्रयासों की पुतिन ने की तारीफ
25 करोड़ की रंगदारी का क्या है मामला?
यह मामला कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को कथित तौर पर विदेशी नंबर से भेजे गए धमकी भरे संदेशों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, उनसे 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। जांच के दौरान शोएब ढेबर का नाम सामने आया और उसे गिरफ्तार किया गया था।
बाद में उसे अदालत से जमानत मिल गई। इसके बाद पुलिस ने दोबारा गिरफ्तारी के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी। 29 सितंबर को अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी, लेकिन वह अभी पुलिस की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है।
अब सूचना लीक होने की भी जांच
शोएब के संभावित ठिकाने पर पुलिस के पहुंचने से पहले उसके वहां से निकल जाने के बाद विभागीय स्तर पर यह सवाल उठा है कि पुलिस की कार्रवाई की जानकारी पहले कैसे पहुंची। अब शोएब की तलाश के साथ-साथ इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी अंदरूनी स्रोत से कार्रवाई की जानकारी तो लीक नहीं हुई।
फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों और संपर्कों पर नजर बनाए हुए है।
