आज का पंचांग: 26 अक्टूबर 2026
- दिन: सोमवार
- विक्रम संवत: 2083
- शक संवत: 1948
- अयन: दक्षिणायन
- ऋतु: हेमंत
- मास: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: पूर्णिमा सुबह 9:41 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा
- नक्षत्र: अश्विनी शाम 5:41 बजे तक, इसके बाद भरणी
- योग: वज्र दोपहर 2:17 बजे तक, इसके बाद सिद्धि
- राहुकाल: सुबह 8:04 बजे से 9:30 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:39 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:05 बजे
- दिशाशूल: पूर्व दिशा
कार्तिक व्रत-स्नान आज से आरंभ
धार्मिक पंचांग के अनुसार, 26 अक्टूबर से कार्तिक व्रत-स्नान की शुरुआत हो रही है। कार्तिक मास को भगवान विष्णु की आराधना, स्नान, दान और दीपदान के लिए विशेष माना जाता है। श्रद्धालु इस अवधि में सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं।
कार्तिक मास के दौरान तुलसी पूजन, भगवान विष्णु के मंत्रों का जप, भगवद्गीता का पाठ और दीपदान जैसी धार्मिक गतिविधियां करने की परंपरा है। कुछ श्रद्धालु पूरे महीने व्रत और संयम का पालन भी करते हैं।
ध्यान दें कि कार्तिक मास की शुरुआत अलग-अलग क्षेत्रीय पंचांगों में भिन्न हो सकती है। दिए गए विवरण के अनुसार, गुजरात और महाराष्ट्र की परंपरा में कार्तिक मास 10 नवंबर 2026 से शुरू होगा।
कार्तिक मास में स्नान और दान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं में कार्तिक मास के दौरान सूर्योदय से पहले स्नान करना विशेष पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को दान देना, मंत्र जप करना, मौन रखना और देव-दर्शन करना भी इस महीने की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
कई परिवार इस दौरान भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ करते हैं और ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जप करते हैं। तुलसी के पौधे की पूजा और दीप जलाने की परंपरा भी प्रचलित है।
इन धार्मिक कार्यों का महत्व आस्था और परंपरा से जुड़ा है। श्रद्धालु अपनी सुविधा, स्वास्थ्य और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार इनका पालन कर सकते हैं।
कार्तिक मास में खानपान से जुड़े नियम
कुछ धार्मिक ग्रंथों और परंपरागत मान्यताओं में कार्तिक मास के दौरान खानपान को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं। दिए गए धार्मिक विवरण में चावल, दालें, गाजर, बैंगन, लौकी और बासी भोजन से परहेज करने की मान्यता का उल्लेख है।
हालांकि, इन नियमों का पालन अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकता है। इन्हें सार्वभौमिक आहार या स्वास्थ्य संबंधी निर्देश न मानें। यदि किसी को स्वास्थ्य से जुड़ी विशेष जरूरत है, तो भोजन में बदलाव करने से पहले उचित सलाह लेना बेहतर है।
आज का राहुकाल और दिशाशूल
आज सोमवार को दिए गए पंचांग के अनुसार राहुकाल सुबह 8:04 बजे से 9:30 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिष में राहुकाल के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। दिशाशूल पूर्व दिशा में बताया गया है।
राहुकाल और दिशाशूल की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है। किसी महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य या यात्रा के लिए स्थानीय पंचांग का समय देखना उचित रहेगा।
आज का धार्मिक संदेश
कार्तिक मास में नियमित पूजा, स्नान, दान और दीपदान को आध्यात्मिक अनुशासन का हिस्सा माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस अवधि के दौरान संयम, सेवा और सदाचार पर विशेष जोर दिया जाता है।
