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मेडिकल कॉलेजों की फीस कटौती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दो संस्थानों की फीस फिर होगी तय

रायपुर डेस्क: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क में कटौती करने तथा विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाने के निर्देशों को रद्द कर दिया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और श्रीबालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की याचिकाएं स्वीकार करते हुए शुल्क का नए सिरे से निर्धारण करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले को राज्य सरकार के पास वापस भेज दिया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फीस तय करते समय कॉलेजों के वास्तविक खर्च, विद्यार्थियों की संख्या और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों का उचित आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही, दोनों संस्थानों को नई प्रक्रिया में प्रभावी सुनवाई का अवसर देना भी जरूरी होगा।

दो निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस फिर से तय होगी

हाईकोर्ट ने रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और श्रीबालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति को नए सिरे से शुल्क निर्धारित करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट के मुताबिक, फीस निर्धारण की प्रक्रिया में संस्थानों के वास्तविक खर्च और अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों में विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखना होगा। इसके लिए कॉलेजों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि नई प्रक्रिया में दोनों मेडिकल कॉलेजों को अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर दिया जाए। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर शुल्क तय किया जाए।

हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क घटाने के आदेश रद्द

दोनों मेडिकल कॉलेजों ने प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति की 3 अप्रैल 2025 की अनुशंसा के साथ राज्य शासन के 18 सितंबर 2025 और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा के 23 सितंबर 2025 के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

इन आदेशों के तहत दोनों संस्थानों के हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क में कटौती की गई थी। साथ ही, विद्यार्थियों से निर्धारित राशि से अधिक वसूली गई रकम लौटाने के निर्देश भी दिए गए थे।

श्रीबालाजी मेडिकल कॉलेज ने प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष हॉस्टल और मेस के लिए 3 लाख रुपये तथा परिवहन के लिए 2.5 लाख रुपये शुल्क प्रस्तावित किया था। समिति ने हॉस्टल और मेस का शुल्क घटाकर 78,059 रुपये और परिवहन शुल्क घटाकर 13,719 रुपये कर दिया था।

इन शुल्कों के निर्धारण और कटौती की प्रक्रिया को लेकर संस्थानों ने आपत्ति जताई थी। हाईकोर्ट ने अब संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए नए सिरे से शुल्क निर्धारण का रास्ता साफ किया है।

कॉलेजों ने वास्तविक खर्च का आकलन नहीं करने का उठाया मुद्दा

याचिकाकर्ता मेडिकल कॉलेजों की ओर से दलील दी गई कि फीस निर्धारित करते समय संस्थानों के वास्तविक खर्च का उचित आकलन नहीं किया गया। कॉलेजों के मुताबिक, भवनों के रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन, बिजली, ईंधन, परिवहन और अन्य सुविधाओं पर होने वाले खर्च को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

संस्थानों ने यह भी कहा कि अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों में कुल विद्यार्थियों और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की संख्या में अंतर था। इसके बावजूद समिति ने शुल्क तय करने के लिए एक समान आधार अपनाया।

कॉलेजों की ओर से सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने की बात भी उठाई गई। इन दलीलों के आधार पर संस्थानों ने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे।

हाईकोर्ट ने कहा- वित्तीय दस्तावेजों का निष्पक्ष आकलन जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति को मुनाफाखोरी और निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूली रोकने का अधिकार है। हालांकि, फीस तय करते समय कॉलेजों की ओर से पेश किए गए प्रासंगिक वित्तीय दस्तावेजों पर भी विचार करना जरूरी है।

अदालत के अनुसार, केवल संस्थानों को सुनवाई का अवसर देना पर्याप्त नहीं है। उनके द्वारा प्रस्तुत सामग्री और खर्च से जुड़े दस्तावेजों का वास्तविक एवं निष्पक्ष आकलन भी किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने पाया कि समिति की अनुशंसा में वास्तविक खर्च, हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या और अलग-अलग मदों में होने वाले व्यय पर उचित विचार किए जाने का स्पष्ट आधार नहीं दिखता।

अब राज्य सरकार को नए सिरे से करना होगा शुल्क निर्धारण

हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों निजी मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। इस प्रक्रिया में संबंधित वित्तीय दस्तावेजों, संस्थानों के वास्तविक खर्च और विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखना होगा।

अदालत ने मामले को राज्य सरकार के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया है कि शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया में दोनों कॉलेजों को प्रभावी सुनवाई का अवसर दिया जाए।

इस फैसले से दोनों संस्थानों के शुल्क विवाद पर दोबारा विचार होगा। हालांकि, नई प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हॉस्टल, मेस और परिवहन शुल्क की अंतिम राशि स्पष्ट हो सकेगी।

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