आइए जानते हैं आज का पंचांग, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त और धनतेरस पर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बताई गई विशेष साधना विधि।
आज का पंचांग: 2 नवंबर 2026, सोमवार
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दिन: सोमवार
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विक्रम संवत: 2083
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शक संवत: 1948
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अयन: दक्षिणायन
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ऋतु: हेमंत ऋतु
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मास: कार्तिक
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: अष्टमी दोपहर 1:10 बजे तक, इसके बाद नवमी
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नक्षत्र: अश्लेषा, 3 नवंबर रात्रि 3:46 बजे तक; इसके बाद मघा
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योग: शुभ दोपहर 12:07 बजे तक, इसके बाद शुक्ल
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राहुकाल: सुबह 8:07 से 9:32 बजे तक
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सूर्योदय: सुबह 6:43 बजे
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सूर्यास्त: शाम 6:01 बजे
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दिशाशूल: पूर्व दिशा
अष्टमी तिथि पर इन बातों का रखें ध्यान
सनातन पंचांग में दी गई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी तिथि पर नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। इसका उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्म खंड में बताया गया है।
चतुर्मास को लेकर स्कंद पुराण में भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में तांबे और कांसे के पात्रों के स्थान पर अन्य धातुओं के बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। वहीं, पलाश के पत्तों से बनी पत्तल पर भोजन करना पुण्यदायी माना गया है।
धनतेरस के दिन करें दीपदान
धनतेरस के दिन दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन पहले बताई गई विधि से यमदीपदान करना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं में धनतेरस की शाम घर के पूजा स्थल पर अखंड दीपक जलाने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि दीपक को दीपावली की रात तक जलाकर रखना चाहिए। कुछ परंपराओं में इसे भाई दूज तक अखंड रखने की बात भी कही गई है।
धनतेरस पर दीपक जलाने से जुड़ी कुछ अन्य पारंपरिक विधियां इस प्रकार हैं:
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घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाएं। इसमें रुई की जगह लाल रंग के धागे की बत्ती और थोड़ी केसर डालने की परंपरा बताई गई है।
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घर में तेल का दीपक जलाकर उसमें दो काली गुंजा डालें। गंध आदि से पूजन करने के बाद इसे घर के मुख्य द्वार पर अन्न की ढेरी पर रखने की मान्यता है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक को रातभर जलता रखना चाहिए।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की कृपा के लिए विशेष साधना
दीपावली पर मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि की कामना से विशेष साधना करने की परंपरा है। ‘पर्वों का पुंज दीपावली’ पुस्तक में धनतेरस से लक्ष्मी प्राप्ति की साधना शुरू करने की विधि बताई गई है।
धनतेरस की तिथि: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
साधना के लिए आवश्यक सामग्री:
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दक्षिणावर्ती शंख
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केसर
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गंगाजल का पात्र
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धूप और अगरबत्ती
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दीपक
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लाल वस्त्र
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स्फटिक की माला
साधना की विधि:
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साधक अपने सामने गुरुदेव और मां लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें।
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उनके सामने लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रखें।
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शंख पर केसर से स्वास्तिक बनाएं और कुमकुम से तिलक करें।
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इसके बाद स्फटिक की माला से नीचे दिए गए मंत्र का सात माला जाप करें।
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यह साधना लगातार तीन दिनों तक करने की विधि बताई गई है।
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मंत्र जाप पूरा होने के बाद शंख को लाल वस्त्र में बांधकर घर में सुरक्षित स्थान पर रख दें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस विधि से साधना करने और शंख को घर में रखने से सुख-समृद्धि बनी रहती है।
लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृहे स्थिरो ह्रीं ॐ नमः।
यह साधना विधि ‘पर्वों का पुंज दीपावली’ पुस्तक में दी गई जानकारी पर आधारित है। इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए।
