इस फैसले के बाद भूपेंद्र कुलदीप को संचालनालय अटैच करने के आदेश का आधार समाप्त हो गया है। विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद की व्यवस्था को लेकर अब शासन के अगले कदम पर नजर रहेगी।
29 सितंबर को जारी हुआ था आदेश
उच्च शिक्षा विभाग ने 29 सितंबर को भूपेंद्र कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में अटैच करने का आदेश जारी किया था। इसी आदेश के तहत डॉ. अनिल पांडेय को प्रभारी कुलसचिव नियुक्त किया गया था।
इस फैसले को चुनौती देते हुए भूपेंद्र कुलदीप ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से दलील दी गई कि यह नियमित तबादला नहीं, बल्कि विभागीय जांच लंबित होने के कारण किया गया अटैचमेंट है।
अटैचमेंट के लिए भी स्पष्ट वैधानिक आधार जरूरी
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शासन का आदेश निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को संबंधित नियमों के तहत विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के स्थानांतरण की शक्ति हो सकती है, लेकिन इससे किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी को उच्च शिक्षा संचालनालय जैसे सरकारी विभाग में भेजने का अधिकार नहीं मिल जाता।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अटैचमेंट के लिए शासन ने कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान या अधिकार नहीं बताया। इसी आधार पर आदेश को निरस्त कर दिया गया।
अब शासन के अगले फैसले पर नजर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भूपेंद्र कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय में अटैच करने का निर्णय प्रभावी नहीं रह गया है। वहीं, दुर्ग विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद को लेकर आगे क्या प्रशासनिक व्यवस्था की जाएगी, यह शासन के अगले आदेश से स्पष्ट होगा।
