Chandra Grahan November 2020 Date and Time in India: कल कार्तिक पूर्णिमा है. इसी दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है. वहीं कल इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रग्रहण को बहुत अधिक प्रभावशाली माना जाता है. यह चंद्र ग्रहण 30 नवंबर दिन सोमवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को लगेगा. कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को पड़ने वाला यह ग्रहण कुल 04 घंटे 18 मिनट 11 सेकंड तक रहेगा. जबकि, 3:13 मिनट पर यह अपने चरम पर होगा. ग्रहण रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में इस बार का चंद्रगहण पड़ने वाला है. यह चंद्र ग्रहण भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और एशिया में दिखाई दे सकता है. आइए जानते है कल लगने वाला चंद्र ग्रहण के बारे में पूरी डिटेल्स…
गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानी
ज्योतिषियों के अनुसार सभी ग्रहण का एक सूतक काल होता. सूतक काल ग्रहण लगने से पहले ही शुरू हो जाता है. इस दौरान ध्यान और मंत्र जाप के अलावा कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता. अगर उपच्छाया ग्रहण है तो कोई सूतक काल नहीं होगा. लेकिन ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं अपने घर के बुजुर्गों की सलाह के अनुसार कुछ उपाय जरूर अपना सकती हैं.
वृषभ राशिवाले बरतें सावधानी
वृषभ राशि वालों को ग्रहण के समय और कुछ दिनों तक थोड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी. खासकर इस दौरान स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा.
इस बार नहीं लगेगा सूतक काल
चंद्र ग्रहण 30 नवंबर यानि कल लग रहा है. यह इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण होगा, जो उपछाया चंद्र ग्रहण होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण का लगना अशुभ माना जाता है. ग्रहण में लगने वाले सूतक का विचार किया जाता है. ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि उपछाया चंद्र ग्रहण के कारण इस बार सूतक काल मान्य नहीं होगा.
ग्रहण के दौरान कुछ खाने से बचें
ग्रहण काल के समय भोजन नहीं करना चाहिए. क्योंकि ये शरीर के लिए नुकसानदायक माना गया है. घर में पके हुए भोजन में सूतक काल लगने से पहले ही तुलसी के पत्ते डालकर रख देने चाहिए. इससे भोजन दूषित नहीं होता है.
कैसे लगता है चंद्रग्रहण
जब पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देता है तो उसे चंद्रग्रहण कहा जाता है. या यूं कहे कि यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में चली जाती है.
किस राशि पर कैसा पड़ेगा चंद्र ग्रहण का प्रभाव
कार्तिक महीने की पूर्णिमा पर उपच्छाया चंद्र ग्रहण वृष राशि और रोहिणी नक्षत्र में लगेगा. जिसका अशुभ असर वृष, मिथुन, सिंह, कन्या और धनु राशि वाले लोगों पर रहेगा. वहीं मेष, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले लोग अशुभ प्रभाव से बच जाएंगे.
जानें किस नक्षत्र में लगेगा चंद्रग्रहण
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक शुक्ल की पूर्णिमा तिथि यानि कल इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. इस बार का ग्रहण वृषभ राशि में लगेगा. वहीं, पंचांग के अनुसार इस समय रोहिणी नक्षत्र रहेगा.
कैसे लगता है उपछाया चंद्र ग्रहण
जब धरती की वास्तविक छाया पर ना पहुंच कर चंद्रमा उसकी उपच्छाया से ही लौट जाती है तो इसे उपछाया चंद्रग्रहण कहते हैं. इस स्थिति में चांद पर धुंधली परत भी बन जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे ग्रहण के दौरान सूतक काल नहीं पड़ता. आमतौर पर ऐसे ग्रहण नंगी आंखों से नहीं दिख पाते हैं.
भारत में नहीं दिखाई देगा चंद्रग्रहण
इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण कल लग रहा है. यह चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. यह चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, क्योंकि यहां जब चंद्र ग्रहण लगेगा उस समय दोपहर रहेगा.
इस बार नहीं होगी सूतक काल की मान्यता
चंद्र ग्रहण 30 नवंबर यानि कल दोपहर में लग रहा है. यह चंद्र ग्रहण इस साल का आखिरी है, जो उपछाया चंद्र ग्रहण होगा. धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण का लगना अशुभ माना जाता है. ग्रहण में लगने वाले सूतक का विचार किया जाता है. ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि उपछाया चंद्र ग्रहण के कारण इस बार सूतक काल मान्य नहीं होगा.
यहां जानें चंद्र ग्रहण का सही समय
चंद्र ग्रहण कल यानि 30 नवंबर दिन सोमवार की दोपहर 1 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा और शाम 5 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा. चंद्र ग्रहण का परमग्रास दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर को होगा.
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष सावधानी
कल जो ग्रहण लगेगा, वह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा. इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. लेकिन गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी होगी. ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक विचार किया जाता है. माना जाता है कि ग्रहण के हानिकारक प्रभाव से गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर पर उसका नकारात्मक असर होता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है.
क्या है उपछाया चंद्रग्रहण
जब चन्द्रमा पृथ्वी की धूसर छाया में से होकर गुजरता है तो इस तरह की परिस्थिति बनती है. इसे उपच्छाया चन्द्रग्रहण कहते हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा. इस दौरान मंदिर आदि बंद नहीं किए जाएंगे. पूजा-पाछ को लेकर भी कोई नियम आदि नहीं माना जाएगा. दरअसल यह उपछाया चंद्रग्रहण है.
